◼️जापान से वापस लौटने पर मंजू नायाल का स्कूल में हुआ जोरदार स्वागत
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- गुरूकुल द स्कूल के शारीरिक शिक्षा विभाग की कोर्डिनेटर मंजू नायाल ने आइची नागोया, जापान में हुए एशियन गेम्स में रेफरी के रूप में भाग लेकर देश का गौरव बढाया। जापान से स्कूल लॉटने पर उनका जोरदार स्वागत किया। स्कूल के निदेशक सचिन वत्स व प्रिंसिपल गौरव बेदी ने कहा कि मंजू नायाल ने अपने स्कूल, जनपद, उत्तर प्रदेश के साथ देश का गौरव भी बढाया है, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है। मंजू नायाल ने कहा कि एशियन गेम्स में इंटरनेशनल टेक्निकल ऑफिसियल के रूप में जाना उनके जीवन की सबसे यादगार और गर्वपूर्ण यात्रा है।
कुराश की प्रतियोगिता के लिए 70 रेफरी थे। उनमें से 40 रेफरी मैचों में ऑफिशिएट करने के लिए चुने गए, और उन 40 में से केवल 20 रेफरी सेंटर रेफरी के रूप में चयनित हुए। इसके बाद ओपनिंग बाउट्स के लिए सिर्फ 6 रेफरी चुने गए और उनमें से भी 2 रेफरी को फाइट कराने की जिम्मेदारी दी गई। उन दो रेफरी में उनका नाम होना मेरे लिए शब्दों से परे एक गर्व का क्षण था। मंजू नायाल ने कहा कि जब टेक्निकल मीटिंग में मेरा नाम लिया गया और मेरे रेफरिंग कौशल की सराहना की गई, उस समय मेरी आँखें खुशी और गर्व से भर आईं। एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करना बहुत ही सौभाग्य की बात है। मेरे लिए यह केवल एक बाउट ऑफिशिएट करने का अवसर नहीं था, बल्कि मेरे पूरे सफर की एक बड़ी उपलब्धि थी।
जापान की इस यात्रा ने उन्ळें सिर्फ रेफरिंग नहीं सिखाई, वरन जीवन और अनुशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें भी सिखाई। विनम्रता, समय की पाबंदी, अनुशासन और मुस्कुराते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाना जापानी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहाँ हर काम निर्धारित समय पर और पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाता है। चाहे परिस्थिति कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, व्यवहार में शालीनता और चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है। जापान से मिली इन सीखों को वे अपने विद्यार्थियों तक पहुंचाने का कार्य करेंगी और बच्चों को खेल के माध्यम से समय की पाबंदी, अनुशासन, टीमवर्क, विनम्रता, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, हार-जीत को सम्मान के साथ स्वीकार करना और हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना सिखाएंगी।