◼️अष्टमी तिथि का प्रभाव दो दिन रहने से महाअष्टमी व महानवमी एक ही दिन 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी
◼️नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की उपस्थिति के चलते कलश स्थाना अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ होगा
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- सनातन संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक नवरात्र पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होगा। आचार्य दीपक तेजस्वी ने बताया कि इस बार के नवरात्र पर्व की खास बात यह है कि यह नौ दिन की बजाय 10 दिन का होगा। ऐसा अष्टमी तिथि की वृद्धि के कारण हो रहा है। इसके अलावा एक और खास बात महाअष्टमी व महानवमी दोनों का एक दिन होना है। आचार्य दीपक तेजस्वी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की उपस्थिति रहने वाली है। इन योग में कलश स्थापना करना वर्जित माना गया है। ऐसे में नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त शुभ रहेगा।
अभिजित मुहूर्त 11 अक्टूबर की प्रातः 11 बजकर 22 मिनट से 12 बजकर 09 बजे तक रहेगा और इस दौरान कलश स्थापना करना शुभ होगा। वैसे कुछ ज्योतिषाचार्य 11 अक्टूबर की प्रातः 06 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 बजे तक भी घटस्थापना का शुभ मुहूर्त बता रहे हैं। अष्टमी तिथि का प्रभाव दो दिन रहने से नवरात्र का एक दिन बढ गया यानि नवरात्र नौ दिन की बजाय 10 दिन के हो गए हैं। पंचागों के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की प्रातः 08 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 19 अक्टूबर को प्रातः 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उसके तुरंत बाद महानवमी तिथि शुरू हो जाएगी।
इसी कारण उदया तिथि के चलते महाअष्टमी व महानवमी की पूजा व कन्या पूजन दोनों 19 अक्टूबर को होंगे। 20 अक्टूबर का दशहरा यानि विजयादशमी का महापर्व मनाया जाएगा। दशहरा को अबूझ यानि स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। भगवान राम के रावण पर विजय के चलते दशमी तिथि अपने आप में इतनी पवित्र और सकारात्मक होती है कि इसमें बिना कोई पंचांग देखे हर प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकते हैं।