शम्भु दयाल पीजी कॉलेज में "Literature And Indian Freedom Struggle" विषय पर व्याख्यान माला का शुभारंभ




रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- शम्भु दयाल (पीजी) कॉलेज, गाजियाबाद में भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष व्याख्यान माला के अंतर्गत आज "Literature And Indian Freedom Struggle: Challenges and Understanding" विषय पर प्रथम व्याख्यान आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. जितेन्द्र नागर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लाला लाजपत राय कॉलेज, साहिबाबाद रहे। उन्होंने भारत के इतिहास को समझने के लिए इतिहास एवं साहित्य दोनों के अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. नागर ने कहा कि इतिहास कई बार राज्याश्रित होने के कारण वास्तविक स्थिति को स्पष्ट नहीं कर पाता, जबकि साहित्य में भले ही चरित्र काल्पनिक हों, परंतु घटनाएं अपने मौलिक रूप में चित्रित होती हैं।

उन्होंने बताया कि 'नील दर्पण' और 'सोमप्रकाश' जैसे पत्रों ने किसानों-मजदूरों के शोषण को उजागर कर जनता को जागरूक किया। वहीं 'आनंदमठ' का "वंदे मातरम" और 'भवानी मंदिर' जैसी रचनाओं ने युवाओं को क्रांति के लिए प्रेरित किया। साहित्य में छोटी-छोटी घटनाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिससे उस समय के इतिहास को गहराई से समझा जा सकता है।

कार्यक्रम में राजनीतिशास्त्र विभाग के प्रो. जय कुमार सरोहा ने कहा कि भारत प्रारंभ से एक राष्ट्र के रूप में संगठित नहीं था, यही कारण था कि विदेशी आक्रमणकारी भारतीय राज्यों पर आक्रमण करते रहे और अपना शासन स्थापित करने में सफल रहे।

कॉलेज प्राचार्या प्रो. रोचना मित्तल ने मुख्य वक्ता डॉ. जितेन्द्र नागर को एक पौधा भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने स्वतंत्रता पूर्व की स्थिति तथा स्वतंत्रता संघर्ष के अनेक अनछुए पहलुओं पर चर्चा करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। प्राचार्या ने उपस्थित शिक्षकों को धन्यवाद देते हुए शोध छात्रों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्रीय संदर्भों में जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

व्याख्यान माला के शुभारंभ के लिए प्रो. प्रियंका सिंह एवं डॉ. पूनम सिंह के प्रयासों की सराहना की गई। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. पूनम सिंह ने किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोध छात्र एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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