रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- राजनगर सेक्टर 10 स्थित गुरूद्वारा श्री नानक दरबार में गुरू हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में बाला प्रीतम कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। कीर्तन दरबार में शहर के विभिन्न क्षेत्रों की संगत ने श्रद्धाभाव से भाग लिया। हजूरी रागी भाई महीपाल सिंह, भाई गुरविंदर सिंह सूरी व भाई जगजीत सिंह बबीहा ने कीर्तन से गुरू महिमा का बखान किया और संगत को निहाल कर दिया।
उन्होंने कहा कि गुरू के बिना जीवन निरर्थक है।, जिसके जीवन में भी गुरू का प्रवेश हो गया, उसी का जीवन सार्थक हो गया। गुरूद्वारे के प्रधान एस एस पुरी ने कहा कि गुरू हरिकृष्ण साहिब जी सिखों के आठवें गुरु थे। वे सातवें गुरू हर राय व माता किशन कौर के दूसरे पुत्र थे। 1661 में जब वे मात्र 5 वर्ष के ही थे, तो गुरु गद्दी पर विराजे। अल्प आयु में ही समाज को ज्ञान, करुणा और निस्वार्थ सेवा का अनूठा संदेश देने के कारण उन्हें बाला प्रीतम भी कहा जाता है। उनके संदेश आज भी पूरे विश्व को मानवता, करूणा व ज्ञान का मार्ग दिखाने के कार्य कर रहे है।
गुरूद्वारे के सचिव सुरेंद्र जीत सिंह ने कहा कि दिल्ली में चेचक व हैजा जैसी महामारी फैलने पर गुरू हरिकृष्ण साहिब जी ने दिल्ली आकर दिन-रात बिना किसी भेद-भाव के पीड़ित लोगों और रोगियों की सेवा की। इससे वे स्वयं भी चेचक की चपेट में आ गए और 30 मार्च 1664 को दिल्ली में ही अल्प आयु में ज्योति जोत समा गए। चेयरमैन परमजीत सिंह सलूजा ने कहा कि गुरू हरिकृष्ण साहिब जी ने करूणा, सेवा का जो मार्ग दिखाया उस पर चलकर ही मानवता का कल्याण हो सकता है। मंजीत सिंह सेठी, गुलशन अनेजा, गुरमीत सिंह आदि भी मौजूद रहे।