श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों को स्मरण करना ही श्राद्ध हैः आचार्य दीपक तेजस्वी


◼️श्राद्ध पक्ष का शनिवार से शुरू होना व समाप्त होना यह संकेत दे रहा है कि सच्चे मन से पूर्वजों को याद करने से पूर्वजों के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होगी



रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि श्राद्ध पक्ष यानि पितृ पक्ष शनिवार 26 सितंबर  से शुरू हो रहा है और इसका समापन शनिवार 10 अक्टूबर को होगा। श्राद्ध ऐसा अनुष्ठान है जो मृत आत्मा की शांति के लिए उनके बच्चों या रिश्तेदारों द्वारा किया जाता है। आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि हमें जीवन में जो भी प्राप्त हुआ है, उसमें अहम योगदान हमारे पूर्वजों यानि पितरों के संघर्ष व बलिदान का है। अपने ऐसे पूर्वजों को सच्चे मन से यानि श्रद्धापूर्वक स्मरण करना ही श्राद्ध है। इस दिन ब्राहमण को भोजन कराना बहुत ही शुभ रहता है। 

ब्राहमण ना मिले तो किसी जरूरतमंद को भोजन कराने से भी हमारे पूर्वज संतुष्ट हो जांएगे। यदि कोई व्यक्ति आर्थिक स्थिति के चलते कोई दान करने या किसी को भोजन कराने में असमर्थ है तो वह श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए भगवान सूर्य नारायण को एक लोटा जल ही अर्पित कर दे तो पूर्वज उससे ही संतुष्ट हो जाएंगे। हमारे पूर्वज हमसे सिर्फ यही चाहते हैं कि हम कुछ समय उन्हें स्मरण करें और सदैव अच्छे कार्य करें। हमारे इतना करने से ही संतुष्ट होकर हमारे पूर्वज हम पर अपनी कृपा की बारिश कर देंगे और हमारा जीवन खुशहाल हो जाएगा। 

आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि श्राद्ध के दिनों में मछलियों को दाना खिलाना या आटा खिलाना और गाय को रोटी खिलाने से हमारे पूर्वजों की आत्माओं को शांति की प्राप्ति होती है। इस बार के श्राद्ध शनिवार से ही शुरू होंगे और शनिवार को ही समापन होगा। श्राद्ध देव जिन्हें  वैवस्वत मनु भी कहा जाता है, वे और शनि देव दोनों भाई हैं। श्राद्ध देव सूर्य देव की पहली पत्नी संज्ञा व शनिदेव सूर्य देव की दूसरी पत्नी छाया के पुत्र हैं। शनिवार से श्राद्ध आरंभ होना यह संकेत देता है कि यदि हम श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों को याद करेंगे तो हमें अपने पूर्वजों के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होगी।

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