रिपोर्ट :- विकास शर्मा
हरिद्वार :- देवभूमि उत्तराखंड कि भाजपा शासित सरकार के परिवहन विभाग द्वारा राजस्व वसूली के नाम पर बाहर अन्य राज्यों से अपने वाहन द्वारा उत्तराखंड राज्य में आने वाले यात्रियों का राष्ट्रीय राजमार्ग पर जमकर शोषण किया जा रहा है। बाहर से आने वाले वाहन स्वामियों का उत्तराखंड के राजमार्गों पर सीपीयू पुलिस द्वारा वाहनों का चालान काटकर जबरन राजस्व बसूली की जा रही है। जिसका शिकार राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन करने वाले स्थानीय लोग भी परिवहन विभाग व सीपीयू पुलिस की वसूली का शिकार बन रहे हैं।
उत्तराखंड की सरकार तथा केंद्र शासित भाजपा सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा परिवहन विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़कों की गुणवत्ता की पोल खोल रहा है। देहरादून हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीपीयू पुलिस तथा परिवहन विभाग द्वारा ओवर स्पीड के चालान काटे जा रहे हैं। जबकि देहरादून से हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर कहीं भी परिवहन विभाग द्वारा स्पीड लिमिट का साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है। जिससे जनता में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यही हाल देहरादून हरिद्वार दिल्ली राष्ट्रीय मार्ग का है। यहां स्पीड लिमिट का कहीं भी बोर्ड नहीं लगाया गया है। जिससे वाहनों की स्पीड का मार्ग दर्शन वाहन स्वामियों को हो सके। उल्टे वाहन स्वामियों के चालान काटकर उनसे अवैध राजस्व वसूली की जा रही है।
जबकि शहरों में अवैध ऑटो तथा ई-रिक्शा का संचालन सीपीयू पुलिस तथा परिवहन विभाग की मिली भगत से निर्बाध रूप से चल रहा है। जिससे आम स्थानीय जनता त्रस्त है। हरिद्वार देहरादून नेशनल हाईवे मार्ग कई जगह से क्षतिग्रस्त होने के कारण दुर्घटना का कारण बन रहा है। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार होती जा रही हैं। जहां आम जनता से रोड टैक्स के नाम पर प्रतिदिन सरकार करोड़ो रुपए वसूल कर रही है।
वहीं अब आम जनता सड़कों पर चलने में सुरक्षित नहीं है। स्थानीय क्षेत्र में पड़ने वाले टोल प्लाजा पर भी 15 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय वाहन स्वामियों से भी टैक्स की अवैध वसूली की जा रही है। स्थानीय जनता ने इस पर रोष प्रकट करते हुए उत्तराखंड मुख्यमंत्री व केन्द्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय से अपील की है कि देहरादून हरिद्वार दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्पीड लिमिट के बोर्ड लगाए जाएं तथा उत्तराखंड में सड़क निर्माण कार्यों में हुई लापरवाही की उच्च स्तरीय पर जांच कराई जानी चाहिए। जिससे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के चेहरे सामने आ सकें।