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विशाल वाणी.....✍🏻

आगरा :- आज भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की माथुर वैश्य सभा भवन में बहुत ही दमदार नाट्य प्रस्तुति रामी का मंचन हुआ। रामी जोधपुर (राजस्थान) के प्रसिद्ध लेखक सत्यनारायण की कहानी है जिसका नाट्य रूपांतरण दिलीप रघुवंशी किया और वही इस नाटक के निर्देशक भी हैं।
रामी कहानी है एक बंजारन बच्ची की जो प्रकृति से बहुत प्रेम करती है। चाहे बरगद जैसा विशालकाय वृक्ष हो या कैर की झाड़ी, कुआँ हो या कोई भी प्राकृतिक मंज़र, रामी हमेशा उनको निहारती रहती है। सत्या नामक एक बच्चे का परिवार ट्रान्सफर होकर उस इलाके में आता है और दोनों बच्चों की दोस्ती हो जाती है। रामी सत्या को प्रकृति के अदभुत दर्शन करवाती है।

सत्या के पिता का फिर ट्रांसफर हो जाता है और दोनों बच्चे अलग हो जाते हैं। बीस साल बाद सत्या फिर वापिस आता है और रामी को ढूंढता है। सत्या को पता चलता है कि वो प्राकृतिक सौंदर्य औद्योगीकरण और शहरीकरण की बलि चढ़ जाता है और रामी प्रकृति को बचाने के प्रयास में अपने प्राणों की आहुति दे देती है। एक बहुत ही सारगर्भित संदेश पर्यावरण के प्रति इस नाटक में आगरा इप्टा और निर्देशक दिलीप रघुवंशी ने देने का सुखद प्रयास किया है।
इस अवसर पर कहानीकार सत्यनारायण स्वयं जोधपुर से पधारे थे।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. ज्योत्सना रघुवंशी ने इप्टा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1942 में बंगाल अकाल के समय राजेंद्र रघुवंशी ने बिशन खन्ना के साथ मिल कर एक कल्चरल स्क्वायड की स्थापना की और अपने गीतों और नाटकों की प्रस्तुति के द्वारा लोगों में जागरूकता की अलख जगाने का कार्य किया। 1943 में विधिवत इप्टा की स्थापना की इस तरह इप्टा का कारवाँ चलता गया। बीच में कुछ रुकावट आईं तो राजेंद्र रघुवंशी ने 1985 में इप्टा का राष्ट्रीय अधिवेशन कर फिर से नवप्राण का संचार किया। रंगमंच एक ऐसा माध्यम है जो जनता से सीधे संवाद करता है। 

कहानीकार सत्यनारायण का संयोजक नीरज मिश्रा द्वारा माल्यार्पण कर स्वागत किया गया तथा आगरा इप्टा के अध्यक्ष सुबोध  गोयल ने शॉल ओढ़ा कर उनका सम्मान किया। छत्तीसगढ़ से पधारे साहित्यकार जय प्रकाश का शकील चौहान ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
रामी की भूमिका में निवेदिता और सत्या की भूमिका में रविंदर सराहनीय रहे तो वहीं सूत्रधार की भूमिका में असलम ख़ान, लेखक की भूमिका में जय कुमार, ग्रामीण की भूमिका में पार्थो घोष और सत्या की माँ की भूमिका में पूजा पाराशर ने अपने पात्रों को जीवंतता प्रदान की। पार्श्व स्वर कुमकुम रघुवंशी का रहा।

संगीत संयोजन सिद्धार्थ रघुवंशी और संगीत संचालन परमानंद शर्मा का रहा। नृत्य संयोजक पूजा शर्मा और लाइटिंग व्यवस्था बब्बू की रही। शकील चौहान और शैलेन्द्र शर्मा ने प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभाली और मुख्य सहयोग रहा कुमकुम रघुवंशी और मुक्ति किंकर का तो वहीं रिकॉर्डिंग का भार इमामुद्दीन ने संभाला। रूपसज्जा आनंद बंसल की रही। अंत में क्रांतिकारी रोशन लाल सुतेल स्मृति समिति ने सभी प्रतिभागी कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए व धन्यवाद सुबोध गोयल ने ज्ञापित किया। प्रमुख रूप से डॉ शशि तिवारी, अनिल शुक्ला, प्रियंका मिश्रा, अनिल जैन, धर्मजीत सिंह आदि शहर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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