◼️शिविर के अंतिम दिन परीक्षा लेकर पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया
◼️चारों अन्तरप्पा का भी सम्मान हुआ
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- अर्हं ध्यान योग का 5 दिवसीय शिविर 18 जून से 22 जून तक मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर पंचवटी में आयोजित किया गया। शिविर में अर्हं ध्यान योग के साथ ही मेरी भावना नामक पाठ के प्रथम दोहे को कई प्रकार की एक्टिविटी के माध्यम से समझाया गया। योग के दौरान रीढ़ को सीधा रखने से क्या लाभ होता है उसे भी एक्टिविटी के माध्यम से बताया गया। शिविर की मुख्य संप्रेषक अर्हं ध्यान योग की वरिष्ठ अन्तरप्पा दीप्ति जैन रहीं। शिविर में जैन नगर के 50 बच्चों व महिलाओं ने भाग लिया। शिविर के अंतिम दिन परीक्षा ली गई और पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहने वाले बच्चों व महिलाओं को सम्मानित किया गया। चारों अन्तरप्पा को भी मंदिर समिति द्वारा सम्मानित किया गया।
शिविर का संचालन मुख्य रूप से अर्हं ध्यान योग की वरिष्ठ अन्तरप्पा दीप्ति जैन ने किया तथा अन्तरप्पा प्रद्युम्न जैन, सीमा जैन एवं सुनीता जैन ने विशेष सहयोग दिया किया।* मंदिर समिति से अनु जैन अध्यक्ष पंकज जैन, वीरेंद्र जैन आदि का सहयोग रहा। समापन के दिन बच्चों महिलाओं ने शिविर के दौरान सीखी गई बातों से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। अन्तरप्पा प्रद्युम्न जैन ने कहा कि यह गुरुवर के संस्कारों का प्रभाव है कि शिविर इतना अधिक सफल रहा। जहाँ गुरु का स्पर्श होता है, वहाँ सेवा स्वाभाविक बन जाती है। अर्हं ध्यान योग की वरिष्ठ अन्तरप्पा दीप्ति जैन ंने अपने अनेक कार्यों के बीच से समय निकालकर पूर्ण समर्पण भाव से इस शिविर को स्वीकार किया। अन्तरप्पा सुनीता जैन, सीमा जैन व सभी अन्तरप्पाओं ने जिस निस्वार्थ भाव से सहयोग दिया, वह वास्तव में प्रेरणादायक है।
वे ं जैन मंदिर जैन नगर की पूरी कार्यकारिणी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिनकी अनुमति और सहयोग से यह शिविर आयोजित हो सका। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि आप सभी ने समय दिया, मन लगाया, सीखा, समझा और वातावरण को जीवंत बनाया। इसलिए इस शिविर की सफलता का श्रेय जितना मंच पर बैठे लोगों को है, उतना ही आप सभी को भी है।..यदि इन कुछ दिनों में आपको अर्हं ध्यान योग से कुछ भी लाभ अनुभव हुआ हो, यदि आपको लगा हो कि जीवन में कुछ सकारात्मक परिवर्तन आया है, तो इसे केवल अपने तक सीमित मत रखिए। गुरुदेव कहते हैं कि ज्ञान का सबसे सुंदर उपयोग हैकृउसे आगे पहुँचाना। अतः जो कुछ भी इस शिविर में सीखा, उसे अन्य लोगों तक अवश्य पहुंचाएं।