रिपोर्ट :- अजय रावत
गाज़ियाबाद :- इस सृष्टि की रचना परमात्मा ने की है और परमात्मा ने जो भी जीव जंतु धरती पर भेजे हैं पेड़ पौधे पहाड़ जो भी सृष्टि में है जिसके अंदर जान है उसे भूख लगती है यह अलग बात है की रिजक् देने का वायदा भी परमात्मा ने किया है। इंसान की भूख कई तरह की होती है आंखों की भूख. नियत की भूख. पेट की भूख. दौलत की भूख. सेवा की भूख .और वाहेगुरु के नाम की भूख.!
(अगर भूख ही बढ़ानी है तो अपने अंदर सेवा की भूख बढ़ाओ जो तुम्हें परमात्मा से जोड़ती है)
पेट की भूख तो शांत हो जाती है दो या तीन रोटी खाने से मगर दौलत की भूख लग जाए तो वह कभी शांत नहीं होती!
( दौलत की भूख इंसान को गुनहगार भी बना देती है और कातिल भी!) फिर वह अपना पराया भी नहीं देखता दौलत की भूख तो शायद शब्द हल्का हो दौलत की हवस भी कहा जा सकता है! दौलत की भूख कातिल भी बना देती है इसलिए भूख ही बढ़ानी है तो सेवा सिमरन की भूख बढ़ाए जो वाहेगुरु से जोड़ती है! आंखों की भूख खतरनाक भूख है एक बार मन संतुष्ट हो सकता है अगर आंखें नहीं.* लालची आंखें इंसान का आपा भी खो देती है! इंसान सब्र में रहने से संतुष्ट जीवन जीता है।
श्री गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज के अध्यक्ष सरदार मनजीत सिंह सम्मानित टीचर्स के बीच भूख के ऊपर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की इंसान की भूख चाहे वह जिस तरह की भी हो अगर जरूरत से ज्यादा भूख है तो वह इंसान को बेइज्जत भी कर देती है भूख चाहे पेट की हो आंखों की हो चाहे नियत की हो चाहे दौलत की हो जरूरत से ज्यादा भूख इंसान को बेइज्जत करा देती है इंसान को अपने अंदर सेवा की भूख पैदा करनी चाहिए जब इंसान में सेवा की भूख पैदा हो जाती है तो परमात्मा की इबादत की भी भूख खुद बा खुद लगने लगती है !
जिस तरह इंसान आंखों की भूख को बहुत जल्दी में संतुष्ट नहीं कर पाता इसी तरह नियत की भूख भी बहुत गंदी है पेट भरा भी हो मगर नियत नहीं भरती इंसान नियत खराब हो तो अपना हो या किसी दूसरे का घर हो नियत गंदी हो तो इंसान को बेइज्जत भी करा देती है! सबसे सस्ती भूख पेट की भूख होती है इंसान मांग कर भी खा लेता है तो कुछ घंटे के लिए संतुष्ट हो जाता है! मगर बाकी की भूख इंसान को बेइज्जत भी करा देती है!
दौलत की हो तो इंसान को गुनहगार और कातिल भी वाहेगुरु के नाम की लोग आपको वाहेगुरु से जोड़ती है सेवा आपको मददगार बनाती है परमात्मा से दोस्ती इंसान को समाज में सम्मान दिलाती है कोई भी भूख हमारी एक सीमा में है तो कोई बुरा नहीं मगर अति हर चीज की बुरी होती है किसी भी तरह की जरूरत से ज्यादा भूख इंसान को बेइज्जत कराती है
तो दोस्तों भूख ही बढ़ानी है तो परमात्मा के नाम की बढ़ाओ जो परमात्मा के सिमरन नाम इबादत से जुड़ जाए तो इंसान मददगार बनता है जब आप मददगार बनते हैं तो परमात्मा आपको खुशियां देता है परमात्मा आपको सब्र देता है इसलिए भूखी बढ़ानी है तो अपने अंदर सेवा की भूख बढ़ाओ सेवा की भूख बढ़ाओ धन्यवाद
सरदार मनजीत सिंह
आध्यात्मिक गुरु आध्यात्मिक एवं सामाजिक विचारक
शिक्षाविद . चिंतक .समाजसेवी .धर्म उपदेशक. अध्यक्ष
श्री गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज अध्यक्ष