बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार पुरस्कृत हुए झीलों की नगरी भोपाल में





सुशील कुमार शर्मा....✍🏻

नई दिल्ली :- “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया” प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच  का बारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन एवं 25 वां हेमंत स्मृति कविता सम्मान  समारोह शनिवार, दिनांक 31 जनवरी, 2026 को भोपाल के “ला पर्ल” होटल में आयोजित किया गया | सुबह 10:30 से  संध्या 6 बजे तक तीन सत्रों,  “अलंकरण सत्र, "लघुकथा सत्र" और “काव्य सत्र” में सभी कार्यक्रम संपन्न हुए ।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं महिमा श्रीवास्तव वर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई सरस्वती वंदना से हुआ।  
  
अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक/ अध्यक्षा/वरिष्ठ लेखिका  संतोष श्रीवास्तव ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल में स्वागत की परंपरा अतिथियों के चरण पखार कर की जाती है। मैं अपने शब्दों के जल से यह कार्य कर रही हूं। उन्होंने नवाज़ देवबंदी का शेर सुनाते हुए अपनी वाणी को विराम दिया।यह मत सोच राह के जख्म कितने गहरे हैं। बस यह सोच कि मंजिल का सुकून कितना बड़ा है। हेमंत फांउडेशन की संस्थापक - सचिव डा. प्रमिला वर्मा ने  “हेमंत परिचय” दिया। वहीं संस्था परिचय प्रदेश अध्यक्ष शेफालिका श्रीवास्तव एवं निर्णायक उद्बोधन उपाध्यक्ष डॉ. नीलिमा रंजन ने दिया। 
 
इस सत्र में देश-विदेश से चयनित साहित्यकारों को साहित्य की विभिन्न विधाओं, कला, पर्यावरण और समाज सेवा के क्षेत्रों में सम्मानित किया गया। श्रीमती रूबी मोहंती  (25 वां हेमंत स्मृति कविता सम्मान) डॉ. अलका अग्रवाल सिगतिया, श्रीमती शकुंतला मित्तल, डॉ. विद्या सिंह, डॉ. रानी श्रीवास्तव, श्री सुनील दुबे वृक्षमित्र, श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव,श्री  शंकारानंद,  श्रीमती कुसुम भट्ट , श्रीमती रजनी गुप्त, श्रीमती जया आर्या, श्रीमती एकता अमित व्यास,श्रीमती रत्ना पांडेय, सुश्री आशा सिंह गौर, श्री देवेंद्र श्रीवास्तव, श्री बद्र वास्ती को प्रतीक चिन्ह,शॉल,श्रीफल एवं पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।अलंकरण सत्र की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री श्री कैलाश चंद्र पंत ने संस्था एवं पुरस्कृत साहित्यकारों को अपने आशीर्वचनों से नवाजा।
 मुख्य अतिथि प्रेम जनमेजय ने कहा- ' ऐसे समय में जब सम्मान विपरीत अर्थ दे रहा हो, सम्मान समारोह का आयोजन बड़े जोखिम का काम है। संस्था यह जोखिम प्रतिवर्ष उठाती है।

 विशिष्ट अतिथि राम स्वरूप दीक्षित ने कहा- 
'आज जब साहित्य के लिए जगहें सिमटती , सिकुड़ती जा रही हैं, तब बिना किसी संसाधन और सरकारी या गैर सरकारी सहायता के ऐसा राष्ट्रीय आयोजन कर ले जाना बहुत मायने रखता है। 'हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार के अलावा साहित्य और समाज के लिए काम करने वाले लोगों को इस आयोजन में पुरस्कृत करना इसे एक बहुउद्देशीय और बहुअर्थी आयोजन बनाता है।'

विशिष्ट अतिथि ऋषि कुमार शर्मा ने कहा - 'आज जब दुनिया अनेक विभाजनों, संघर्षों और असहमतियों से जूझ रही है, तब साहित्य मैत्री, संवाद और संवेदना का सेतु बन सकता है। विभिन्न देशों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए रचनाकारों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भावनाएँ सार्वभौमिक होती हैं और रचनात्मकता किसी सीमा में बंधी नहीं होती।
 
अपने बेहद भावपूर्ण एवं जीवंत वक्तव्य से संचालन करते हुए संस्था महासचिव मुजफ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने समा बांधा एवं धन्यवाद ज्ञापन  जया केतकी ने किया।
द्वितीय सत्र, लघुकथा सत्र की अध्यक्षता श्रीमती कांता राय ने की। मुख्य अतिथि डॉ शरद सिंह  विशिष्ट अतिथि वन्या  जोशी एवं डॉ क्षमा पांडेय थी।श्री गोकुल सोनी,डॉ. विद्या सिंह,सुश्री शकुंतला मित्तल, सुश्री मनवीन कौर, डॉ. शुभ्रा ,सुश्री मनोरमा, श्री सत्येन्द्र सिंह, सुश्री मृदुल त्यागी, सुश्री सरोजलता सोनी,सुश्री लता तेजेश्वर, डॉ. अलका अग्रवाल सिग्तिया एवं ऋचा शर्मा ने लघुकथा पाठ किया । इस सत्र का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ साहित्यकार श्री घनश्याम मैथिल ने किया।

तीसरे और अंतिम, कविता  सत्र के मुख्य अतिथि श्री संजीव कुमार, श्री इकबाल मसूद एवं श्री संजय सक्सेना थे। सारस्वत अतिथि के तौर पर कर्नल  गिरिजेश सक्सेना ने मंच को सुशोभित किया। इस सत्र में कविताओं,गजल,गीतों के निर्झर मुग्ध भाव से झरे। कविता सत्र में सुश्री आशा सिंह गौर,श्री विजयकांत वर्मा,श्री आबिद काजमी, श्री साकेत सुमन चतुर्वेदी,डॉ रत्ना पांडेय,सुश्री रूबी मोहंती, श्री मनोज अबोध, सुश्री  रमा त्यागी, श्री के पी गुप्ता, श्री विपिन पवार,सुश्री जया विलतकर, डॉ. रेणु श्रीवास्तव  सुश्री जया आर्य. सुश्री मधूलिका सक्सेना,सुश्री राजकुमारी चौकसे,श्री ब्रजभूषण मिश्र,श्री अशोक व्यग्र ने कविता पाठ किया। इस सत्र का संचालन डा. विनीता राहुरीकर और धन्यवाद ज्ञापन रानी सुमिता ने किया। 

कविता पाठ एवं लघुकथा पाठ में प्रतिभागिता करने वाले रचनाकारों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।श्री कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री घोषित किए जाने के उपलक्ष में एवं डॉ संजीव कुमार को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने पर संस्था द्वारा उनका अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में भोपाल शहर के पत्रकारों साहित्यकारों एवं झांसी ,दिल्ली ,मुंबई ,इंदौर , सतना ,टीकमगढ़ ,देहरादून ,पुणे ,गुरुग्राम गाजियाबाद ,नोएडा ,अहिल्या नगर आदि विभिन्न शहरों से आए हुए  साहित्यकारों और पत्रकारों की उपस्थिति रही।

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