◼️संस्था के सक्रिय सदस्य प्रद्युम्न जैन के नेतृत्व में बड़ा गांव, मंडोला एवं हस्तिनापुर स्थित गौशालाओं में गौमाताओं की सेवा की गई
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- आचार्य 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य, सरस्वती पुत्र, अर्हं ध्यान योग के प्रणेता मुनि 108 श्री प्रणम्य सागर महाराज की प्रेरणा एवं मंगल आशीर्वाद से ॐ अर्हं सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा संचालित संस्था अर्हं जीव दया भारत ने अपनी छठी वर्षगांठ देश भर में सेवा, साधना और संवेदना के भाव के साथ मनाई। अर्हं ध्यान योग के अन्तरप्पाओं ने देश के विभिन्न राज्यों एवं नगरों में स्थित गौशालाओं में जाकर गौमाता को गुड़, हरा चारा एवं पौष्टिक आहार अर्पित किया।
यह सेवा केवल गौमाता तक सीमित न रहकर, समस्त जीवों के प्रति करुणा, दया और सह-अस्तित्व के भाव को जागृत करने का सशक्त माध्यम बनी। संस्था द्वारा पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और हरित भविष्य के लिए अधिक से ंअधिक पौधों के रोपण का संकल्प भी लिया गया। देश के विभिन्न गुरुकुलों एवं शिक्षण संस्थानों में बच्चों के आध्यात्मिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास हेतु अर्हं ध्यान योग के विशेष सत्रों का आयोजन कर बच्चों को पंच मुद्रा, अर्हं क्लैप, कायोत्सर्ग, प्राणायाम, योगासन एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया, ताकि उनमें आत्मअनुशासन, एकाग्रता, संस्कार और संतुलित जीवन मूल्यों का विकास हो सके।
गाजियाबाद से अर्हं ध्यान योग के अन्तरप्पा एवं अर्हं जीव दया भारत संस्था के सक्रिय सदस्य प्रद्युम्न जैन के नेतृत्व में बड़ा गांव, मंडोला एवं हस्तिनापुर स्थित गौशालाओं में जाकर 200 से अधिक गौमाताओं को हरा चारा एवं गुड़ खिलाया गया। बड़ा गांव एवं मंडोला गौशाला में 5 वर्ष के छोटे बच्चे से लेकर 84 वर्ष के बुजुर्ग तक चार पीढ़ियों ने एक साथ गौमाता की सेवा की। “नन्हे कदम, बड़ा भाव” की प्रेरणा को साकार करते हुए मोड़निम्ब, सोलापुर स्थित गौशाला में पाठशाला के नन्हे-नन्हे बच्चों को साथ लेकर गौमाता को चारा अर्पित किया गया, जिससे बाल मन में करुणा, दया और जीवमात्र के प्रति सम्मान के बीज रोपे जा सकें।
प्रद्युम्न जैन ने कहा कि संस्था का यह प्रयास मानव जाति के आध्यात्मिक उत्थान के साथ-साथ गौमाता एवं समस्त जीवों की सेवा के माध्यम से अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व के मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का कार्य करेगा और आने वाले समय में और अधिक विस्तार के साथ राष्ट्र के जन-जन को दया, करुणा और चेतना से जोड़ता रहेगा।