◼️वन से भाई राम की खड़ाऊं लेकर वापस लौटे भरत
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद। श्री रामलीला समिति राजनगर की ओर से चल रही रामलीला में भरत के ननिहाल से लौट कर आने के बाद के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। राम, लक्ष्मण और सीता के वन गमन के पश्चात उनके वियोग में राजा दशरथ के प्राण पखेरू उड़ जाते हैं। उनकी मृत्यु के पश्चात् अयोध्या नगरी में चारों ओर हाहाकार मचा हुआ हैं। राजा की मृत्यु के बाद राजकुमार भरत को तत्काल उनकी ननिहाल से बुलाया जाता हैं। अयोध्या वापस लौटने पर जब भरत को सारी स्थितियों का पता चलता हैं तो वह अपनी माता कैकेयी को काफी खरी खोटी सुनाते हैं। पिता का दाह संस्कार करने के बाद वह गुरु, मंत्री, तीनों माताओं व अन्य दरबारियों के साथ चित्रकूट के वन में श्री राम से मिलने पहुॅचते हैं और वापस अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। राम द्वारा मना करने पर वह भारी मन से राम जी की चरण पादुका सिर पर धारण करके वापस अयोध्या लौटते हैं।
इस मौके पर सांसद अतुल गर्ग मुख्य अतिथि रहे। समिति के संस्थापक एवं संरक्षक जितेन्द्र यादव तथा नरेश सिंघल, महामंत्री दीपक मित्तल, कोषाध्यक्ष आर के शर्मा, मेला प्रबंधक एस एन अग्रवाल, स्वागताध्यक्ष योगेश गोयल, पार्षद प्रवीण चौधरी, राजीव मोहन गुप्ता, आर एन पाण्डेय, ब्रजमोहन सिंघल, राधेश्याम सिंघल, सुभाष शर्मा, महावीर बंसल, आलोक मित्तल, दीपक मित्तल , अमरीश त्यागी, राजीव त्यागी, जी.पी. अग्रवाल, सुन्दर लाल यादव, मुकेश मित्तल, विनोद गोयल, राजीव गुप्ता, प्रचार मंत्री सौरभ गर्ग, दिनेश शर्मा, मोतीलाल गर्ग, अनिल कुमार क्वालिटी स्टील वाले, मनीष वशिष्ठ, मदन लाल हरित, डीके गोयल, दीपक सिंघल, गोल्डी सहगल, ओमप्रकाश पोपली भोला, विजय लुम्बा, पंकज भारद्वाज, जेपी राणा, श्रीमती उषा गुप्ता, श्रीमती मंजू त्यागी, श्रीमती प्रीति मित्तल सहित राजनगर के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।