27 अगस्त को आनंद योग और शुभ योग में मनाई जाएगी श्री गणेश चतुर्थी: पंडित शिवकुमार शर्मा




रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार 27 अगस्त को भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी उदयकालीन तिथि में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बुधवार को हस्त नक्षत्र  होने से आनंद योग बनता है और शुभ योग का भी निर्माण हो रहा है। 11 दिन तक चलने वाला गणेश महोत्सव उत्तर भारत में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। 
भक्तगण इस दिन गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति लाते हैं उन्हें अपने घर में स्थापित करते हैं और विधि विधान से भोग आदि व्यवस्था करके आरती, भजन आदि का आयोजन करते हैं। 
2 दिन से लेकर के 11 दिन गणेश जी को अपने घर में स्थापित करते हैं। 

भक्तगण काफी उत्साह के साथ गणेश जी को घर लाते हैं श्रद्धा से उत्साह से पूजन करते हैं भोग  लगाते हैं और आरती व भजन आदि का आयोजन करते हैं। अब तो मोहल्ले में और सोसाइटीज में सम्मिलित रूप से भी गणेश विराजमान की परंपरा आरंभ हो गई है। 

गणेश विराजमान करने की शुभ तिथियां
27 अगस्त, 28 अगस्त,29 अगस्त, 30 अगस्त,1 सितंबर, 2 सितंबर, 3 सितंबर ,4 सितंबर और 5 सितंबर
दिनों के अनुसार दो ,तीन, पांच ,सात, नौ, ग्यारह दिन का आयोजन किया जाता है। उपरोक्त तिथियां में बहुत ही शुभ मुहूर्त बने हुए हैं। इस बार गणपति विसर्जन  6 सितंबर अनंत चतुर्दशी को होगा।जो  भगवान विष्णु का दिन है।
सबसे पहले अपने परिवार में परामर्श करके कितने दिन के लिए गणेश जी को विराजमान करना है। उसी प्रकार से उनकी भोग आदि की व्यवस्था बनाई जाए। भगवान गणेश जी के भोग में विशेष कर लड्डू का महत्व होता है। लड्डू ,मोदक आदि भगवान गणेश को प्रिय हैं। इसके अलावा पंचमेवा, खीर ,फल ,मिष्ठान ,घर में बना हुआ सात्विक भोजन आदि का भोग लगा सकते हैं। प्रातः सायं दोनों समय उनकी आरती करना, उनका भजन कीर्तन करना, इसे दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। विसर्जन के दिन जो आपने तय किया है उस दिन उनको बड़ी श्रद्धा और विनम्रता  के साथ में उन्हें पुनः आने का निमंत्रण देकर के प्रशासन द्वारा बनाए गए विसर्जन क्षेत्र में ही विसर्जन करना चाहिए।

गणेश चतुर्थी को नहीं करना चाहिए चंद्र दर्शन
पौराणिक मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी अर्थात गणेश चतुर्थी को चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए ।  इस दिन चंद्र दर्शन करने  से कोई ना कोई आक्षेप, झूठा कलंक आदि लगने की संभावना बढ़ जाती है। यदि भूल बस चंद्रमा के दर्शन हो गए हैं तो वहीं खड़े होकर के उनकी तरफ को पत्थर फेंकना चाहिए इससे भी उसका देखने का परिहार हो जाता है ।इसलिए इसको कलंक चौथ, पत्थर चौथ आदि के नाम से जाना जाता है।भगवान कृष्ण को भी इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने  पर कलंक का भाजन बनना पड़ा था।

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