रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- अभी हाल ही में सीबीएसई एवं यूपी बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा समाप्त होते ही छात्र आगे की पढ़ाई के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी करना शुरू कर देते है जिसमे काफी बड़ा तबका पिछले 1 या 2 वर्षो से ही अपनी आगे की पढ़ाई की भूमिका बना लेता है जिसमे वह इंजीनियरिंग के लिए आईआईटी एवं एनआईटी जैसे प्रमुख संस्थान, मैनेजमेंट एवं कॉमर्स के लिए आईआईएम या दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख संस्थान, 5 वर्षीय लॉ करने के लिए एनएलयू व इसके अलावा होटल मैनेजमेंट, मास कम्युनिकेशन आदि कोर्सेज में जाने के लिए भारत के विभिन्न जाने माने संस्थानों के प्रवेश परीक्षाओ में लाखो की संख्या में हिस्सा लेते है।
आईएमएस कोचिंग राजनगर के डायरेक्टर एवं आईआईएम कोलकाता एलुमनाई राहुल गोयल बताते है कि लोकप्रियता के आधार पर देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षो में बच्चो में बारहवीं के तुरंत बाद आई.आई.एम. जाने का क्रेज जिस प्रकार बढ़ा है उसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पहले केवल एक आई.आई.एम. (इंदौर) अपने कैंपस पर जिस इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (बीबीए + एमबीए) को ऑफर करता था वह कोर्स अब आई.आई.एम. रोहतक, रांची, जम्मू, बोधगया और यहाँ तक कि अब आई.आई.एम. अमृतसर ने भी शुरू कर दिया गया है। ऐसा सुनने में आया है कि आई.आई.एम. शिलांग भी जल्द ही इसी साल से पांच वर्षीय मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है व आई.आई.एम. सिरमौर ने भी अपने यहाँ ग्रेजुएशन यानी बी.एम.एस. प्रोग्राम की शुरुआत कर दी है।
राहुल गोयल बताते है कि आई.आई.एम. से पढ़ने का सपना 3 लाख से भी अधिक छात्र छात्रा अपनी ग्रेजुएशन के बाद कैट का एग्जाम देकर पूरा करना चाहते है परन्तु अब जागरूक छात्र एवं उनके परिजन यह सपना बारहवीं के तुरंत बाद भी पूरा कर रहे है जिसमे बच्चा दसवीं कक्षा के बाद स्कूल के साथ ही आई.आई.एम. प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर आई.आई.एम. में स्थान पा रहा है। परीक्षा में क्वांटिटेटिव एबिलिटी(मैथ्स), लॉजिकल रीजनिंग(तर्कशक्ति) एवं वर्बल एबिलिटी (इंग्लिश) से सामना होता है जिसके लिए नियमितता, स्पीड एवं एक्यूरेसी का होना बेहद आवश्यक है और यह क्षमता निरंतर प्रयास से ही संभव है।