जिंदगी को बयां करने का माध्यम ही शायरी हैः अजीज नबील

◼️समय के साथ कला व साहित्य में बदलाव भी जरूरी है।
 

रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाज़ियाबाद :- 26 जून 1976 को मुंबई में पैदा हुए मशहूर शायर अज़ीज़ उर रहमान और तख़ल्लुस नबील ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और इंस्टीट्यूट ऑफ मटेरियल मैनेजमेंट चेन्नई से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। सन् 1999 से वे दोहा क़तर में निवास करते हैं। उनकी शायरी अपने युग की अत्यंत लोकप्रिय आवाज़ों में से एक है। उनके शायराना सरोकार में जहां प्रवास और अपनी मिट्टी से बिछुड़ने का दुख स्पष्ट है वहीं वह इस भरी पुरी दुनिया में तन्हाई का शदीद एहसास भी रखते हैं। उनके कलाम में वजूद व ख़ुदा के गुप्त रहस्यों को कुरेदने का तत्व भी मौजूद है। वे अपनी शायरी का मिश्रण इस तरह तैयार करते हैं कि वह कानों में देर तक रहती है। सन् 2020 में ष्अज़ीज़ नबील की अदबी ख़िदमात पर रिसर्च वर्क लाहौर पाकिस्तान की लीड्स यूनिवर्सिटी से एक छात्र को एम फ़िल की उपाधि प्रदान हुई है। 

उनके अब तक दो काव्य संग्रह, देवनागरी लिपि में काव्य संग्रह, प्रसिद्ध शायरों पर शोध व संपादित चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुके हैं। अज़ीज़ नबील पुस्तक श्रंखला पत्रिका दस्तावेज़ के प्रधान संपादक हैं, जिसके अब तक चार दस्तावेज़ी वृहद अंक प्रकाशित हो चुके हैं। ािल्वर लाईन प्रैस्टीज स्कूल में आयोजित काव्य गोष्ठी में भाग लेने आए अजीज नबील से बातचीत हुई

सवाल  शायरी से आपकी पहली मुलाकात कब और कैसे हुईघ्
 
जवाब . शायरी से पहली मुलाकात बचपन के दिनों की है। शायरी से मुलाकात का सिलसिला उम्र के साथ बढ़ते.बढ़ते इश्क में बदल गया और अब शायरी के बिना जिंदगी का तस्सवुर नहीं है स शायरी का रस माँ की लोरियों के जरिए कानों से होते हुए दिल तक पहुँचा, फिर शायरी की रोशनी आँखों में किताबों के पन्नों से होते हुए रूह तक पहुँची।  बचपन की शायरी से यह मुलाकात अभी तक कायम है और आगे भी रहेगी।

सवाल आपके लिए शायरी का क्या मतलब है, क्या यह आपकी आत्म.अभिव्यक्ति का एक माध्यम हैघ्
 
जवाब . मेरे लिए शायरी का मतलब जिंदगी है। शायरी जिंदगी को बयां करने का माध्यम है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि अपने ऊपर गुज़री हुई समाज और कायनात में दिखने वाली और घटने वाली छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात को लफ्जों में पिरो देने का नाम शायरी है।
 सवाल 3ण् क्या आपको लगता है कि शायरी समय के साथ बदल रही हैघ् यदि हाँ ए तो किस दिशा मेंघ्
 जवाब. साहित्य हो या और कला समय के साथ बदलाव जरूरी होता है क्योंकि हर समय की अपनी जरूरत होती है। उसकी अपनी अलग खुशियाँ होती हैं। उसके अपने दुख होते हैं। यह बदलाव शायरी के विषय में भी नज़र आता है और भाषा के प्रयोग में भी शायरी अपनी प्राकृतिक दिशा में बदल रही है बस गुणवत्ता नहीं घटनी चाहिए।

सवालः शायरी के माध्यम से आप क्या संदेश देना चाहते हैं
 जवाब. शायरी कोई संदेश नहीं यह तो बस क्रिएटिविटी है। किसी विषय को इस तरह पेश कर देना कि वह आम इंसान की सोच से कुछ अलग लगने लगे। मन या रूह में पैदा होने वाले भाव को  रचनात्मक तरीके से शब्दों की खुशबू और शैली के रस में रचा बसाकर पेश कर उसे यादगार बनाना ही शायरी है।

 सवाल 5 .आपके अनुसार एक अच्छे शायर के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण क्या हैं
 जवाब. अच्छी शायरी के गुण  में सबसे अहम यह है कि कोई बात डायरेक्ट ना कहीं जाए बल्कि इनडायरेक्ट कही जाए। शेर में कोई स्टेटमेंट ना हो क्योंकि यह कोई अखबार नहीं है।  शायरी इशारों के जुबान में होनी चाहिए डायरेक्ट नहीं होनी चाहिए। एक अच्छे शायर को यही गुण अपनाने चाहिए।

सवाल 6  क्या शायरी को लेकर कोई चुनौती महसूस होती है
 जवाब. क्रिएटिविटी के साथ ऊंचे स्तर की शायरी करने की चुनौती बहुत बड़ी है क्योंकि शायरी सहुलत का नहीं रियाज़त का नाम है। जिगर का लहू शामिल करना पड़ता है, रातों की नींद त्यागना पड़ता है। तब अलग और ज़िंदा रहने वाली शायरी पैदा होती है।

सवाल क़तर में अपने लोगों व अपनी ज़मीन से दूर अदब और साहित्य व हिंदुस्तान की सभ्यता के लिए आप क्या कर रहे हैं
 जवाब. इस बात पर मुझे अपना एक शेर याद आता हैस
 हम काफ़िले से बिछड़े हुए हैं मगर नबील
 एक रास्ता अलग से निकले हुए तो हैं
 जिंदगी में सबसे अहम चीज़ होती है उम्मीद। अगर कोई व्यक्ति ना उम्मीद हो जाए तो उसको अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए रास्ता नहीं मिल सकता। यह उम्मीद ही है, जिसने इस बात के लिए मजबूर किया कि हम क़तर जैसे अरब मुल्क में अपनी सर ज़मीन अपनी जड़ों, अपने लोगों से बहुत दूर हिंदुस्तानी संस्कृति, साहित्य और तहजीब उर्दू के फॉर्म में पेश करे। इसके लिए 2007 अब तक हर साल एक भव्य मुशायरा भी करते हैं जिसमें हिंदुस्तान के हर तरह के शायर शामिल होते हैं।  हम कोशिश करते हैं कि एक अच्छा.सा गुलदस्ता बनाकर यहाँ पेश किया जाए ताकि यहां रहने वाले हमारे सर जमीन के लोग हिंदुस्तान की माटी, वहां की संस्कृति,सभ्यता, तहजीब की  महक व रस को महसूस कर सकें।

 सवाल.8 सोशल मीडिया के दौर में  शायरएशायरी और मुशायरा इस पर आप क्या कहते है
 जवाब.  सोशल मीडिया का दौर अलग किस्म का दौर है। आज से 25.35 साल पहले की कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि एक ऐसा दौर हमारे सामने आने वाला है जिसमें सब कुछ बदल जाएगा। इस  दौर शायरों को आदब से ताल्लुक रखने वालों, उनकी सोच, उनके  नज़रिया व क्रिएटिविटी ,का अंदाज भी बदल दिया है। अब इस कदर शायर हो गए हैं कि यह तय कर पाना मुश्किल हो गया है कि इसमें खरा क्या है व खोटा क्या है। हर दौर में बहुत ज़्यादा शायर होते हैं और उनमें से कुछ ही लोग होते हैं जो आने वाले ज़माने तक जिंदा रहते हैं।  सोशल मीडिया के दौर में सबसे बड़ी परेशानी सच और झूठ व असली और नकली की पहचान करना है।

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