सारे सपने बाँध रखे हैं गठरी में, ये गठरी भी औरों में बट जाएगी


 


रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- बारादरी की मासिक गोष्ठी का आयोजन रविवार को सिल्वर लाईन प्रैस्टीज स्कूल में हुआ। गोष्ठी में कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि दोहा, कतर से आए अज़ीज़ नबील रहे। उनके शकर सारे सपने बाँध रखे हैं गठरी में, ये गठरी भी औरों में बट जाएगी को खूब पंसद किया गया। 

डॉ माला कपूर गौहर की रचना हर इक जफ़ा पे दिल से वफ़ा कर रही हूँ मैंए हक़ अपनी आरज़ू का अदा कर रही हूँ मैं तथा उर्वशी अग्रवाल उर्वी की रचना सोचती थी कि क्या दिया उसने ज़हर मीठा पीला दिया उसने को भी पसंद किया गया। 

बारादरी के अध्यक्ष गोविंद गुलशन के शेर रेगिस्तानी आँखों में भी हैं तस्वीरें पानी की क्याण्क्या पेश करूँ बतलाओ और नज़ीरें पानी की पर खूब तालियां बजीं। आलोक यात्री, सुरेंद्र सिंघल, मासूम गाजियाबादी, डॉ राम सिंह, तरुणा मिश्रा व नेहा वैद ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की।

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