रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- न्यूनतम शुल्क पर शिक्षा प्रदान करने वाले विद्यालयों को आर्थिक संकट से बचाने और आरटीई के अंतर्गत मिलने वाली प्रतिभूति राशि में वृद्धि की मांग को लेकर शिक्षाविद् जग्गी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनेक निजी विद्यालय ऐसे हैं जो बिना किसी रियायती दर पर भूमि प्राप्त किए अपने सीमित संसाधनों के आधार पर गरीब और निर्धन परिवारों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।
पत्र में कहा गया है कि इन विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 25 प्रतिशत छात्रों को प्रवेश देना अनिवार्य होता है, जबकि सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रतिभूति राशि वर्ष 2016 से अब तक मात्र 450 रुपये प्रतिमाह है। उन्होंने बताया कि विद्यालयों को शिक्षकों के वेतन, भवन कर, विद्युत शुल्क और अन्य संसाधनों पर लगातार बढ़ते खर्च का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इन संस्थानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
जग्गी ने अपने पत्र में अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में आरटीई के अंतर्गत लगभग 2342 रुपये तथा उत्तराखंड में करीब 1500 रुपये प्रतिमाह प्रतिभूति राशि दी जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह राशि बेहद कम है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए आरटीई प्रतिभूति राशि में तत्काल वृद्धि की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में निर्णय नहीं लिया गया तो न्यूनतम शुल्क पर शिक्षा प्रदान करने वाले अनेक विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे, जिससे गरीब और निर्धन परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी।