दुनिया में भगवान बुद्ध एकमात्र अनात्म दर्शन के ऋषि है: राम दुलार यादव




रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट द्वारा ज्ञानपीठ केन्द्र 1, स्वरुप पार्क जी0 टी0 रोड साहिबाबाद के प्रांगण में महान दार्शनिक, मानवतावादी, धार्मिक पाखंड, रुढ़िवाद के घोर विरोधी भगवान बुद्ध का जन्म दिन बोधि प्राप्त तथा महापरि निर्वाण दिवस का आयोजन किया गया, कार्यक्रम में शामिल सभी साथीगण और विद्वानों ने भगवान बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें स्मरण किया, तथा उनके द्वारा दिये गये उपदेश पर चलने का संकल्प लिया।
     
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के संस्थापक/अध्यक्ष, समाजवादी चिन्तक, राम दुलार यादव शिक्षाविद ने कहा कि भगवान बुद्ध का दर्शन मानवतावादी है, दुनिया में भगवान बुद्ध एकमात्र अनात्म दर्शन के ऋषि है, जिन्होंने व्यक्ति के सर्वांगीण कल्याण का मार्ग दिखाया, और कहा कि “अप्पो दीपो भव” अपना मार्ग आप को स्वयं देदीप्यमान करना होगा, उन्होंने सभी दुखों की जड़ तृष्णा को माना, चार आर्य सत्य और अष्टांगिक सूत्र समाज को दिया, उनका ज्ञान मध्यम मार्ग है, भगवान ने स्वयं कहा है कि “इस शरीर रूपी तंत्री को इतना न कस दो कि इसके तार टूट जाय, और न इतना ढीला छोड़ दो कि इसमे आवाज ही न आये” प्रत्येक जीव पर दया करना, सत्य, अहिंसा का मार्ग प्रशस्त किया | भगवान के विचार मानव जाति को कष्ट से छुटकारा दिलाने के लिए आज भी प्रासंगिक है।
       
श्री यादव ने कहा कि आज अज्ञानता, तृष्णा, आर्थिक छीना-झपटी तथा वर्चस्व स्थापित करने के कारण पूरा विश्व युद्ध की विभीषिका झेल रहा है, लाखों लोग असमय काल-कलवित हो रहे है, अफरा-तफरी मची है, 21वीं शदी में हम खून के प्यासे अहंकार और अज्ञानता के कारण हो रहे है, ऐसी स्थिति में केवल भगवान बुद्ध द्वारा दिया गया सिद्धांत ही मानवता को बचा सकता है | वह एक मात्र ऐसे दार्शनिक है जिन्होंने व्यक्ति के दुःख, कारण और निवारण का रास्ता दिखाया है तथा कहा कि “जो बात तर्क की कसौटी पर खरी न उतरे, उसे मत मानो, चाहे मै ही कह रहा हूँ” भगवान बुद्ध को महामानव की श्रेणी में ले जाती है, उन्होंने ज्ञान की ज्योति को पूरे विश्व में फैलाया, आज भगवान बुद्ध को मानने वाले देश, विकसित देशों में शामिल हैं।
       
कार्यक्रम को मुख्य अतिथि कैलाश चन्द्र, जय नारायण शर्मा, जगन्नाथ प्रसाद, सी0 बी0 मौर्य, राम प्यारे यादव ने भी संबोधित किया, हुकुम सिंह ने भगवान के चरित्र पर लिखित गीत, राजेन्द्र सिंह ने धार्मिक पाखंड विरोधी भजन सुना कार्यक्रम में शामिल सभी को आत्म विभोर कर दिया, कार्यक्रम की अध्यक्षता डा0 विशन लाल गौड़ ने, आयोजन इंजी0 धीरेन्द्र यादव ने किया, मुख्य रूप से समारोह में शामिल रहे, डा0 देवकर्ण चौहान, राज कुमार, बैजनाथ रजक, सी0 बी0 मौर्य, ओम प्रकाश अरोड़ा, सम्राट सिंह यादव, ब्रह्म प्रकाश, मुनीव यादव, एस0 एन0 जायसवाल, राम प्यारे यादव, कैलाश चन्द्र, अमृत लाल चौरसिया, परदेशी, अवधेश यादव, सुरेन्द्र यादव  आदि, कार्यक्रम का शुभारम्भ ज्ञान ज्योति प्रज्वालित कर किया गया।

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