रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गाजियाबाद में स्थित सिद्धपीठ श्रीदूधेश्वरनाथ मठ महादेव मंदिर में 2026 के पहले दिन भक्ति और श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा और हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा दूधेश्वनाथ का जलाभिषेक किया।
श्रीदूधेश्वरनाथ के पीठाध्वीश्वर तथा जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि ने बताया कि ब्रह्ममूर्त में पूजा अर्चना के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले तो उससे पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग चुकी थी। भगवान दूधेश्वरनाथ के जलाभिषेक का सिलसिला प्रात: चार बजे से पहले ही शुरु हो गया था।
श्रीमहंत ने बताया कि वह खुद सुबह चार बजे से धूनी के पास बैठे हैं और बाबा दूधेश्वर का जलाभिषेक करके आ रहे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद और प्रसाद दे रहे हैं। कड़ाके की ठंड में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। भीड़ को देखते हुए अंधेरे में ही पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया और मंदिर में सेवा करने वाले श्रद्धालुओं के साथ व्यवस्था बनाने में लगे हैं।
श्रीदूधेश्वरनाथ के पीठाधीश्वर ने अंग्रेजी नव वर्ष पर भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों के मंदिर में आकर भोले बाबा का जलाभिषेक करने को अच्छी परंपरा बताया और कहा कि वर्ष प्रतिपदा पर भी श्रद्धालुओं में इसी तरह से अपनी श्रद्धा का प्रदर्शन करना चाहिए।
श्रीमहंत ने कहा कि ह्रिदू नववर्ष की शुरूआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और इस बार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 19 मार्च को है, मगर भारत में अंग्रेजी वर्ष बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में अंग्रेजी नववर्ष की शुरूआत भगवान की पूजा-अर्चना से करना एक अच्छी परम्परा है। इससे जहां भक्ति एवं आध्यात्म की भावना प्रबल होगी, वहीं हमारे अंदर भारतीय संस्कृति, शिक्षा, परम्परा व विरासत के प्रति जिज्ञासा भी उत्पन्न होगी। इससे सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार होगा और वह मजबूत व एकजुट होगा। उन्होंने कहा कि नववर्ष पर जश्न मनाने की बजाय भगवान की पूजा-अर्चना सनातन धर्म के लिए शुभ संकेत है।