विश्व सीओपीडी दिवस पर फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील





रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- विश्व सीओपीडी दिवस पर आई में भवन गाजियाबाद पर प्रेस वार्ता के दौरान सीओपीडी के विषय में चर्चा करते हुए यह बताया गया की सीओपीडी के मरीजों को इस बदलते मौसम में सतर्क रहने की आवश्यकता होती है  कुछ सावधानियां डॉक्टर के बताए अनुसार निश्चित रूप से पालन करें

वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष अग्रवाल ने क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए लोगों से फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की। COPD एक प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है, जो मुख्य रूप से धूम्रपान, प्रदूषण, धूल, रासायनिक गैसों और बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमणों के कारण होती है।

डॉ. आशीष ने बताया कि भारत में COPD तेजी से बढ़ रहा है और समय पर पहचान व उचित उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। 60 मिलियन लोग भारत में प्रभावित हैं इसका प्रीवैलेंस रेट लगभग 5% से ऊपर है यह उत्तर भारतीयों में जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड हरियाणा उत्तर प्रदेश में अधिक पाया जाता है 
उन्होंने कहा,“श्वास में तकलीफ़ को सामान्य न समझें। लगातार खांसी, बलगम, सांस फूलना, छाती में जकड़न जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत फेफड़ों के विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से मरीज एक बेहतर और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।”

धूम्रपान बीड़ी सिगरेट हुक्का इत्यादि का सेवन चूल्हे पर खाना बनाना बायोमास जालना धूल इत्यादि इसके कारकों में मुख्य है उम्र के साथ भी यह बढ़ता है। उन्होंने आगे बताया कि स्पाइरोमेट्री जांच के माध्यम से COPD का सटीक निदान संभव है, और इनहेलर थेरेपी सबसे प्रभावी उपचार पद्धतियों में से एक है। डॉ. आशीष ने धूम्रपान छोड़ने, प्रदूषण से बचाव, नियमित व्यायाम, और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह भी दी।

विश्व सीओपीडी दिवस का उद्देश्य जनता में जागरूकता बढ़ाना, जोखिम कारकों के बारे में जानकारी देना और लोगों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित करना है। अंत में, डॉ. विश्व बन्धु जिन्दल ने कहा कि सही जानकारी, रोकथाम और समय पर उपचार से COPD के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है और मरीज एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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