श्री सिद्धेश्वर महादेव कुटी में नवरात्रि अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ


◼️मंदिर के महंत मुकेशानंद गिरि महाराज से कई शहरों के भक्तों ने आशीर्वाद लिया

◼️श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य में नवरात्रि अनुष्ठान की पूर्णाहुति 7 अप्रैल को होगी



रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- श्री सिद्धेश्वर महादेव कुटी, पाइप लाइन मकरेडा में नवरात्रि अनुष्ठान का शुभारंभ रविवार को श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में मंदिर के महंत मुकेशानंद गिरि महाराज वै़द्य की देखरेख में हुआ। मंदिर में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करने के लिए कई शहरों से श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने पूजा-अर्चना कर महंत मुकेशानंद गिरि महाराज का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने बताया कि मंदिर में 9 अप्रैल 2024 से अनवरत श्री चंडी महायज्ञ चल रहा है, उसकी पूर्णाहुति भी 7 अप्रैल को महारात्रि अनुष्ठान के साथ होगी। मंदिर से रविवार को प्रातः 8 बजे कलश यात्रा निकाली गई जिसमें बडी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। 

कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। प्रातः 10.30 बजे मंदिर में कलश स्थापना की गई और मां शैलपुत्री का पूजन हुआ। मार्जन 11.30 बजे हुआ। फलाहार दोपहर 1 बजे हुआ। अपरान्ह 4 बजे से हवन हुआ और आरती सांय 6.30 बजे की गई। 31 मार्च से 6 अप्रैल तक प्रतिदिन पूजन .सुबह 8 बजे से, मार्जन प्रातः 9 बजे से, फलाहार दोपहर 1 बजे से, हवन सांय 4 बजे से व आरती सांय 6.30 बजे से होगी। 6 अप्रैल को रामचरित मानस का पाठ होगा और भगवान राम का जन्मोत्सव धूमधाम व श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। 

7 अप्रैल को पूजन प्रातः 8 बजे से, हवन व सम्पूर्ण आहुति प्रातः 9 बजे से, मार्जन 11 बजे से, कन्या पूजन व प्रसाद वितरण दोपहर 1 बजे से होगा। महंत मुकेशानंद गिरि महाराज ने सभी मां भक्तों से नवरात्रि अनुष्रूान में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि भक्तों को एक वर्षीय मां के अनुष्ठान से  मां जगदम्बा की अर्जित शक्ति का लाभ भी मिलेगा। मां की भक्ति से ओत-प्रोत आयोजन में भोजन और रहने की व्यवस्था भी है।

दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की सीमा से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर गाजियाबाद के डासना में एक काली माता का मंदिर हैण् आस पास के लोगों और मंदिर के पुजारी का कहना है कि मंदिर कई रहस्यों से जुड़ा हुआ हैण् वहीं मंदिर को लेकर एक मान्यता ये भी है कि मंदिर का निर्माण त्रेता युग में हुआ थाण् मंदिर में महाभारत काल के जुड़े हुए भी काफी किस्से देखने को मिलते हैंण्

दरअसल मंदिर में काली माता की एक मूर्ति हैए जो कि कसौटी के पत्थर से निर्मित हैण् दुनिया भर में कसौटी पत्थर से निर्मित केवल चार मूर्तियां हैंण् जिनमें से तीन मूर्तियां भारत के मंदिरों में हैंण् एक कोलकाता और एक गुवाहाटी के पास कामाख्या मंदिर स्थित हैण् वहीं एक मूर्ति पाकिस्तान में स्थित हिलांज देवी की मूर्ति हैण् कसौटी के पत्थर से निर्मित मूर्तियों की कीमत करोड़ों में बताई जाती हैण्

मंदिर की पौराणिक मान्यताघ्
पुराणों के अनुसार लंकापति रावण के पिता ऋषि विश्वा ने डासना के मंदिर में कई वर्षों तक तपस्या की थीण् जब त्रेता युग में हिंदू धर्म का स्वर्णिम युग चल रहा थाण् उस समय यह मंदिर सनातन धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक हुआ करता थाण् मंदिर को लेकर यह भी कहा जाता है कि लाक्षागृह से सकुशल बच निकलने के बाद पांडवों ने गुप्त रूप से कुछ समय यहां भी बिताया थाण्
मंदिर में शेर की समाधि

मंदिर प्रांगण में एक शेर की समाधि भी देखने को मिलती हैण् दरअसल एक समय मंदिर के आस.पास घना जंगल हुआ करता था और इस मंदिर के पास तालाब में एक शेर प्रतिदिन नियमित रूप से पानी पीने आता थाण् पानी पीने के बाद शेर बिना किसी को हानि पहुंचाए देवी प्रतिमा के सामने कुछ देर तक बैठता था और फिर वापस जंगल में चला जाता थाण् बताया जाता है कि उस शेर ने माता की प्रतिमा के सामने ही अपने प्राण त्याग दिए थेण् उसकी मौत के बाद स्थानीय लोगों ने विशेष रूप से देवी माता की प्रतिमा के सामने शेर की प्रतिमा को स्थापित करवायाएजिसका सबूत आज भी मिलता हैण्

चमत्कारी है मंदिर का कमल सरोवर
मंदिर में कमल के फूलों का एक तालाब भी मौजूद हैण् जिसके बारे में मान्यता है किए अगर इस तालाब में कुष्ठ रोगी एक बार स्नान कर लेता है तो उसकी समस्या खत्म हो जाती हैण् वहीं कमल सरोवर को लेकर एक कहानी ये भी है कि मुगलों के आक्रमण के समय इसी तालाब में इस मूर्ति को छुपा दिया गया थाण् कुछ सालों बाद स्वामी जगत गिरी महाराज को देवी माता ने सपने में दर्शन देकर तालाब में मूर्ति होने की बात बताई थीण् इसके बाद मूर्ति की पुनः स्थापना की गईण् इस कारण से ही तालाब को चमत्कारी माना जाता हैण्

अन्य देवी.देवताओं की भी होती है पूजा
मंदिर में बाला सुंदरी देवीए संतोषी मांए मीनाक्षी देवीए कादंबरी देवी और काली माता के साथ.साथ राम परिवारए शंकर परिवारएनव दुर्गाए देवी सरस्वती और हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैंण् मंदिर हर रोज सुबह 6रू30 बजे खुल जाता हैए और रात्रि 9रू00 बजे तक दर्शन कर सकते हैं
काली माता मंदिर पहुंचने के लिए आपको एनएच. 9 से होते हुए डासना मार्ग की तरफ जाना होगाण् आगे डासना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पड़ेगाण् इससे करीब 200 मीटर की दूरी पर चलेंगे तो बाएं हाथ पर मंदिर का बड़ा सा गेट दिखाई देगाण्

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