रिपोर्ट :- विकास शर्मा
हरिद्वार :- तीर्थ नगरी हरिद्वार में शनिचरी अमावस्या के दिन पौराणिक हर की पौड़ी में श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया और पूजा-अर्चना की। इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुलने की मान्यता है। श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्ध्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
गंगानगर हरिद्वार में प्रातःसे ही हर की पौड़ी पर शनिचरी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनि अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। श्रद्धालु इस दिन मंदिरों में पूजा अर्चना करके भगवान शनि से अपनी परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं और भगवान सूर्य को अर्क देकर अपने पितरों का आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
शनिचरी अमावस्या पितृ कार्य के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन पितरों के लिए पूजा तर्पण कर पितरों का कई गुना आशीर्वाद प्राप्त होता है। मायापुर स्थित नारायणी शिला के प्रबंधक व संचालक मनोज त्रिपाठी ने शनिचरी अमावस्या के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यह अमावस्या पितृ कार्यों के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। अमावस्या तिथि के स्वामी पित्र देव हैं।
शनिचरी अमावस्या के दिन किए गए कार्य व शांति उपाय फल दाई होते हैं। शनिचरी अमावस्या के दिन पितृ पूजन करने से मनुष्य का कालसर्प दोष, शनिचंद्र विषयोग, पितृदोष, सूर्यचंद्र विष योग से मुक्ति प्राप्त होती है।