रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- कथा व्यास पंडित विष्णु दत्त सरस ने कहा कि अहोई अष्टमी का व्रत रविवार 1 नवंबर को मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 4.59 बजे से 6.15 बजे तक रहेगा। पंडित विष्णु दत्त सरस ने कहा कि करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। महिलाएं इस व्रत को अपनी संतान की दीर्घायु, उनके अच्छे स्वास्थ्य व खुशहाल जीवन की कामना के साथ रखती हैं। इस व्रत को भी निर्जला ही रखा जाता है। इस व्रत में तारों को देखकर व तारों की पूजा करके व्रत का पारण करने का विधान है। यह व्रत कर महिलाएं अहोई माता से अपनी संतान की दीर्घायु, उनके अच्छे स्वास्थ्य व खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं।
अहोई अष्टमी को माता पार्वती का स्वरूप ही माना जाता है। उनके स्वरूप को पुतली के आकार में दीवार पर गेरू से या कागज के चित्र में उकेरा जाता है। माता का चित्र ऐसे बनाया जाता है जिसमें आठ कोनों वाले घर की एक पुतली बनाई जाती है। अहोई माता के चित्र के साथ-साथ व्रत की कथा से जुडे साही और उसके बच्चों की आकृतियां बनाई जाती हैं। माता के चित्रण में सूर्य व चंद्रमा भी दिखाए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अहोई अष्टमी व्रत करने से अहोई माता संतान को दीर्घायु प्रदान करती हैं और उन्हें अच्छी सेहत का आशीर्वाद देती हैं।