सुशील कुमार शर्मा.....✍🏻
नई दिल्ली :- विगत 50 वर्षों से लेखन, पत्रकारिता, काव्य और फिल्म जगत में सक्रिय प्रदीप सरदाना को प्रतिष्ठित 'नामवर सिंह जन्मशताब्दी स्मृति सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा। नारायणी साहित्य अकादमी उन्हें जल्द ही दिल्ली में आयोजित अभिनंदन समारोह में सम्मानित करेगी।
साहित्यिक जगत की नामवर हस्ती नामवर सिंह का यह जन्मशताब्दी वर्ष है। हिंदी के एक मूर्धन्य आलोचक के रूप में उन्हें जो ख्याति मिली है वह अप्रतिम है।
इधर सुप्रसिद्ध स्तंभकार, संपादक और विचारक प्रदीप सरदाना का भी लेखन पत्रकारिता में यह अर्ध शताब्दी वर्ष है। प्रख्यात कवि और लेखक डॉ हरिवंश राय 'बच्चन' के शिष्य प्रदीप सरदाना ने मात्र 14 वर्ष की आयु से लेखन, काव्य और पत्रकारिता आरम्भ की थी। मात्र 17 वर्ष की आयु में 'पुनर्वास' अखबार का संपादन करके वह देश के सबसे कम उम्र के संपादक के रूप में भी अपनी उपलब्धि अंकित कर चुके हैं।
फिल्म समीक्षक के रूप में तो वह विख्यात हैं ही। साथ ही काव्य, साहित्यिक, राजनैतिक और समसामयिक विषयों पर भी उनकी विशेष पकड़ है। कवि के रूप में उनकी कविताएं मंच के साथ बरसों से पत्र- पत्रिकाओं में भी सुनी, पढ़ी जाती रही है। श्री सरदाना की एक कहानी का प्रसारण तो दूरदर्शन पर विश्व प्रसिद्ध साहित्यिक कहानियों के प्रसिद्ध सीरियल 'झरोखा' में भी 1993 में हो चुका है।
गत वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर एक कवि के रूप में प्रसार भारती ने अपने 'आकाशवाणी सम्मान' से सम्मानित किया, तो हिंदी अकादमी मुंबई ने भी। जबकि पिछले दिनों ही प्रदीप सरदाना 'पंडित मदन मोहन मालवीय भूषण सम्मान', 'महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार', 'रत्नश्री' और 'अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार' से भी सम्मानित हो चुके हैं।