अर्हं ध्यान योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का भी एक सशक्त माध्यम हैः मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज



◼️ओं अर्हं सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित अर्हं ध्यान योग शिविर में मुनि श्री ने शरीर व मन को स्वस्थ रखने के टिप्स दिए

◼️49 डे योगा काउंटडाउन शिविर में 1500 से अधिक साधकों ने भाग लिया 



विशाल वाणी.....✍🏻

गाजियाबाद :- ओं अर्हं सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा सरस्वती पुत्र प्राकृत मर्मज्ञ अर्हं ध्यान योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज के परम सानिध्य में अर्हं ध्यान योग शिविर का आयोजन किया गया। 21 जून को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित 49 डे योगा काउंटडाउन शिविर में 1500 से अधिक साधकों ने भाग लिया। अर्हं ध्यान योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज ने साधकों को अर्हं ध्यान योग के माध्यम से शरीर का कायाकल्प कर स्वस्थ रहने के टिप्स दिए। 

मुनि श्री प्रणम्य सागर ने कहा कि अर्हं ध्यान योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का भी एक सशक्त माध्यम है। आज की भागदौड व तनाव भरे जिंदगी में हम कुछ समय अर्हं ध्यान योग निकालकर ना सिर्फ खुद को पूर्ण रूप से स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि जीवन में आने वाली विभिन्न चुनौतियों व विपरीत परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं। अर्हं ध्यान योगश् एक प्राचीन श्रमण पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ व शांत रखकर हमारे जीवन का कायाकल्प कर देती है।  

यह योग अहं अहंकार से अर्ह ;अर्हंत पद-शुद्ध आत्मा की यात्रा है, जो मन की भटकाव को रोककर उसे सही दिशा में मोड़ता है।  इसमें शारीरिक व्यायाम, सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायम और अर्हण तकनीक का संयोजन है, जो विशेष रूप से पंच नमस्कार मुद्रा और मंत्र जाप पर आधारित है।  मुनि श्री ने बताया कि यह योग शरीर के 5 केंद्रों शक्ति केंद्र नाभि स्थान, आनंद केंद्र ह्रदय स्थान, विशुद्धि केंद्र कंठ स्थान, ज्ञान केंद्र भृकुटियों के बीच का स्थान व  सिद्धि केंद्र सिर कं उपरी भाग को सक्रिय करता है, जिससे शरीर निरोगी व ऊर्जावान बनता है। उन्होंने इन 5 केंद्रों को सक्रिय कराने के साथ उनसे होने वाले लाभ भी बताए। 

मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज ने एकाग्रता और मानसिक शांति के लिए अरिहंत मुद्रा, आत्म.बोध और ऊर्जा संतुलन के लिए सिद्ध मुद्रा, ज्ञान और निर्णय लेने की क्षमता के लिए आचार्य मुद्रा, विद्या और बुद्धि की वृद्धि के लिए उपाध्याय मुद्रा व अनुशासन और आत्म.संयम के लिए साधु मुद्रा का अभ्यास भी कराया। उन्होंने कहा कि शरीर स्वस्थ रहने के लिए पेट का नरम, सिर का ठंडा व पैरों का गरम होना जरूरी है। अपने शरीर के 5 केंद्रों को सक्रिय कर व पंच मुद्राओं का अभ्यास करने से ही पेट को नरम, सिर को ठंडा व पैरों को गरम रखा जा सकता है। ध्यान योग के माध्यम से जीवन को आगे बढ़ाए तो हम आत्मिक शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। 

योग एवं ध्यान की पवित्र साधना हम सिर्फ मनुष्य गति में ही कर सकते है । किसी और गति में नहीं। मुनि श्री ने बताया कि जीवन में 40 दिन तक पांच अणुव्रत  अहिंसा, ब्रह्म चार्य, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह द्वारा इस योग साधना को 40 दिन तक करते हुए हम अत्यधिक लाभ ले सकते हैं पवित्र संकल्प के बिना हम कोई भी पवित्र कार्य नहीं कर सकते हैं और अपनी आत्मा को अशुद्ध से शुद्ध नहीं बना सकते हैं। मुनि श्री ने पंच के महत्व के बारे में बताया कि पंचम गति ;सिद्ध गति की यात्रा का मार्ग पंच तत्वों से होकर जाता है। पंच मुद्रा, पंच अर्हं क्लैप, शरीर के पंच केंद्र, पंच परमेष्ठि तथा पंच इंद्रिय निरोध ये सभी साधना के महत्वपूर्ण आयाम हैं, जो आत्मोन्नति में सहायक हैं। 

ओं अर्हं सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष चिन्मय कियावत ने कहा कि अर्हं ध्यान योग वास्तव में आज के व्यस्त जीवन में प्राणी मात्र के लिए अर्हं ध्यान योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज का एक वरदान है, जिससे व्यक्ति संपूर्ण रूप से स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकता है। शिविर का शुभारंभ साक्षी दीदी ने अर्हं ध्यान योग के महत्व के बारे में बताकर किया। उन्होंने कहा कि  ध्यान और योग के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को संतुलित बनाकर आत्मिक, शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकता है। 

गाजियाबाद की अन्तरप्पा  जागृति जैन ने बताया कि इस शिविर का आयोजन विश्व शांति विजन के लिए 21 जून विश्व योग दिवस के लिए जागरूक करने के लिए किया गया। उन्होंने बताया कि मुनि श्री के सानिध्य में लालकिला, कुतुब मीनार, राजघाट आदि स्थानों समेत देश भर में विशाल शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे लाखों लोग लाभान्वित हो चुके हैं।

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