◼️वीरेंद्र बाबू वर्मा पक्ष के सभी नौ प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित, विकास भवन में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ चुनाव
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- संजय नगर सेक्टर-23 स्थित श्री आदर्श धार्मिक रामलीला कमेटी के बहुप्रतीक्षित प्रशासनिक चुनाव मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन में शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गए। करीब दो वर्षों से चल रहे कानूनी और संगठनात्मक विवाद के बाद हुए इस चुनाव में वीरेंद्र बाबू वर्मा पक्ष ने पूर्ण वर्चस्व स्थापित करते हुए सभी नौ पदों पर निर्विरोध जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में उत्साह का माहौल दिखाई दिया और इसे “संगठनात्मक एकजुटता तथा न्यायिक प्रक्रिया की जीत” बताया गया। कमेटी के अध्यक्ष पद पर अशोक चांदीवाल, उपाध्यक्ष पद पर पवन शर्मा तथा महामंत्री पद पर अरुण शर्मा निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। इसके अतिरिक्त मंत्री पद पर के.के. शर्मा, संगठन मंत्री पद पर पुष्पेंद्र राघव, प्रचार मंत्री पद पर योगेंद्र सिंह तथा कार्यालय मंत्री पद पर रामेश्वर सिंह सहित सभी प्रत्याशी बिना किसी मुकाबले के विजयी रहे।
2024 से चल रहा था विवाद, डिप्टी रजिस्ट्रार के समक्ष हुई लंबी सुनवाई
रामलीला कमेटी का यह मामला वर्ष 2024 से डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स, गाजियाबाद के समक्ष विचाराधीन था। दोनों पक्षों के बीच कमेटी के वैधानिक संचालन, सदस्यता और अधिकारों को लेकर विवाद गहराया हुआ था। लगभग दो वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान कई बार दोनों पक्षों को अपने-अपने दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार ने 19 सितम्बर 2024 को जिला कार्यक्रम अधिकारी, गाजियाबाद को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया। इसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया।
21 सदस्यों की सूची बनी आधार
डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा कमेटी के कुल 21 सदस्यों की वैध मतदाता सूची निर्धारित की गई। इसी सूची के आधार पर चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। 29 अप्रैल 2026 को रामलीला मैदान, संजय नगर में चुनाव संबंधी सार्वजनिक सूचना चस्पा की गई, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हुई। 30 अप्रैल से 4 मई तक नामांकन पत्र दाखिल किए गए और 5 मई को उनकी समीक्षा के बाद अंतिम सूची जारी की गई। संस्था के उपनियमों के अनुसार कुल नौ पदों के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए थे।
विपक्ष का कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा
चुनाव प्रक्रिया के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि दूसरे पक्ष की ओर से किसी भी पद पर कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया। परिणामस्वरूप निर्वाचन अधिकारी ने सभी नौ प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही इस जीत को कमेटी के भीतर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता के अंत के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद समर्थकों ने इसे संगठन की स्थिरता और पारदर्शी प्रक्रिया की जीत बताया।
हमें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था” — वीरेंद्र बाबू वर्मा
निवर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र बाबू वर्मा ने चुनाव परिणाम के बाद कहा कि उन्हें शुरुआत से ही न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि डिप्टी रजिस्ट्रार ने पूरे मामले में निष्पक्षता बरती और कई बार दोनों पक्षों को सुनने के साथ साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पक्ष द्वारा वर्ष 2014 से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत कर दिए गए थे, जबकि विपक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। उन्होंने यह भी कहा कि कमेटी के कुल 21 सदस्यों में से चार सदस्यों का निधन हो चुका है और वर्तमान 17 सदस्यों में से 16 सदस्य उनके पक्ष के साथ मजबूती से खड़े रहे। यही एकजुटता इस जीत का सबसे बड़ा कारण बनी।
सभी को साथ लेकर चलेंगे” — अशोक चांदीवाल
नवनिर्वाचित अध्यक्ष अशोक चांदीवाल ने कहा कि यह जीत केवल किसी एक गुट की नहीं बल्कि पूरी कमेटी की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह सभी सदस्यों को साथ लेकर पारदर्शिता और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाएंगे।
महामंत्री निर्वाचित अरुण शर्मा ने इसे “संविधान और संगठनात्मक व्यवस्था की जीत” बताया और सभी सदस्यों, समर्थकों तथा वरिष्ठजनों का आभार व्यक्त किया।
कपिल वशिष्ठ और मनोज वर्मा की भूमिका रही अहम
दो वर्षों तक चले इस संघर्ष में पूर्व नामित पार्षद कपिल वशिष्ठ और भाजपा कार्यकर्ता मनोज वर्मा की भूमिका को भी कमेटी सदस्यों ने महत्वपूर्ण बताया। दोनों ने वर्ष 1984 से 2014 तक के दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाकर डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किए। लगातार कानूनी पैरवी और संगठनात्मक समन्वय के कारण मामला निर्णायक मोड़ तक पहुंच सका। कमेटी सदस्यों ने चुनाव के बाद दोनों के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने संगठन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अब रामलीला आयोजन और सामाजिक गतिविधियों पर रहेगा फोकस
नई कार्यकारिणी के गठन के बाद अब कमेटी का ध्यान आगामी रामलीला आयोजन, धार्मिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने पर रहेगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि लंबे विवाद के समाप्त होने से अब संगठन पहले की तुलना में अधिक सक्रिय और मजबूत भूमिका में दिखाई देगा।