रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित निपाह वायरस की नई वैक्सीन “एमवी-एनआईवी” को लेकर चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जगी है। इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. बी. पी. त्यागी, चेयरमैन हर्ष ईएनटी हॉस्पिटल, गाजियाबाद ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस जैसी घातक बीमारी, जिसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक मानी जाती है, के खिलाफ एक प्रभावी वैक्सीन का विकास मानवता के लिए बड़ी उपलब्धि है और यह भविष्य में संभावित महामारियों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
डॉ. त्यागी ने बताया कि यह वैक्सीन संशोधित खसरा वायरस तकनीक पर आधारित है, जिसमें निपाह वायरस की आनुवंशिक सामग्री को सम्मिलित कर शरीर में बिना बीमारी उत्पन्न किए मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है। पशु परीक्षणों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता सिद्ध हो चुकी है, जो इसके वैज्ञानिक आधार को मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2026 से बेल्जियम में मानव परीक्षण शुरू होना चिकित्सा विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यदि यह परीक्षण सफल होते हैं तो आने वाले वर्षों में दुनिया को निपाह वायरस के विरुद्ध एक सुरक्षित और प्रभावी टीका मिल सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह वैक्सीन केवल एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग का प्रतीक है, जिसमें जापान, बांग्लादेश, अमेरिका और अन्य देशों के प्रतिष्ठित संस्थान मिलकर मानवता की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। डॉ. त्यागी के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निपाह वायरस को प्राथमिकता रोगजनक घोषित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि यह बीमारी भविष्य में वैश्विक संकट का रूप ले सकती है, इसलिए इस वैक्सीन का विकास समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
डॉ. बी. पी. त्यागी ने कहा कि “यदि यह वैक्सीन मानव परीक्षणों में भी सफल रहती है, तो यह न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की नई ढाल बनेगी। यह चिकित्सा विज्ञान, अनुसंधान और मानव सेवा की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।” उन्होंने सरकारों, स्वास्थ्य संस्थानों और वैज्ञानिक समुदाय से अपील की कि ऐसे अनुसंधानों को निरंतर सहयोग और समर्थन दिया जाए, ताकि भविष्य की महामारियों से मानवता को सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने अंत में कहा कि निपाह जैसी घातक बीमारियों से लड़ाई केवल अस्पतालों या डॉक्टरों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। वैज्ञानिक प्रगति, जागरूकता, समय पर पहचान और वैश्विक सहयोग के माध्यम से ही हम एक सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त विश्व का निर्माण कर सकते हैं।