दुनिया को भले ही अकड़ दिखाओ,लेकिन मां के सामने कभी बड़ा मत बनो: विजय कौशल जी महाराज

 
◼️राम कथा गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री अरुण असीम सहित अनेक गणमान्य लोगों ने व्यास पीठ से लिया आशीर्वाद

◼️राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप भी राम कथा सुनने के लिए पहुंचे

◼️कथा व्यास ने सप्तम दिन की रामकथा में हनुमान जी के अयोध्या जाने माता जानकी से मिलने और लंका दहन करने के सुंदर प्रसंग सुनाएं



रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- कविनगर स्थित रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार द्वारा आयोजित भव्य श्रीरामकथा के सप्तम दिवस शनिवार को कथा व्यास पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज ने साबरी से मिलने, स्कंधा में प्रवेश करने से  आगे की कथा शुरू करके हनुमान जी के लंका पहुंचने अशोक वाटिका में ज्ञान की मात्रा से भेंट करने, लंका दहन संबंधी कथा का श्रवण कराया। कथा के दौरान बीच-बीच में जय श्री राम के नारे लगाते रहे और संगीत में भजन से सारा वातावरण राम में नजर आया। 

कथा व्यास विजय कौशल महाराज ने कहा कि जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया और उन्हें लंका भेजा गया। लंका जाने तक हनुमान जी को कई तरह की  बाधाओ का सामना करना पड़ा। रास्ते में उनको सूरा, सिरसा और लंकाई जैसी राक्षसनियो से लड़ना पड़ा। इसे दौरान हनुमान जी ने बुद्धिमता से काम लेते हुए छोटा बनकर अयोध्या में प्रवेश करने में सफल रहे।  

विजय कौशल महाराज जी ने कहा कि छोटे बनकर बड़े लोगों की प्रशंसा करते रहिए इससे आप कई तरह की बढ़ाओ से बच सकते हैं और अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बड़े लोग शक्ति के मद में अहंकार से भरे होते हैं, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए हमेशा उनकी प्रशंसा करते रहिए। बड़े लोग छोटे बनकर ही बड़ा काम करते हैं, क्योंकि बड़े लोग आम लोगों की तरक्की में अवरोध उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए छोटा बनाकर उनकी अनुकंपा से अपने कार्य को सिद्ध किया जा सकता है। इसी का अनुपालन करते हुए हनुमान जी लंका में प्रवेश कर गए।

विजय कौशल जी महाराज ने जब हनुमान जी तमाम बाधा पार करके अशोक वाटिका में जानकी माता के समक्ष पहुंचे तो उनके सामने संकट यह था कि वह माता जानकी से किस रूप में  भेंट करें  इसी बीच वहां एक राक्षसी ने सीता माता से कहा  कि उन्होंने एक सपना देखा है जिसमें एक वानर अशोक वाटिका को तहस-नहस करके पूरी लंका को जला देता है। इसी बीच हनुमान जी सूक्ष्म रूप में माता जानकी समक्ष पहुंचते हैं लेकिन उनके नाम द्वारा दी गई अंगूठी गुम हो जाती है तब वह कहते हैं कि वह करुणा निधि राम के सेवक हैं इस पर ध्यान की माता को विश्वास हो जाता है कि उन्हें राम नहीं भेजा है।

कौशल जी महाराज ने कहा कि माता जानकी ने हनुमान जी को राम द्वारा भेजने का पता चलने पर अपनी कीड़ा व्यक्ति की कथा व्यास ने कहा कि आप भले ही कितने बड़े हो जाए और दुनिया को अपनी अकड़ दिखाएं लेकिन कभी भी अपनी माता के सामने अकड़ नहीं दिखानी चाहिए। हनुमान जी ने माता जानकी के सामने अपना विकेट रूप नहीं दिखाई लेकिन उनकी आज्ञा से अशोक वाटिका में फल खाए और उसे बाद में तहस-नहस कर दिया। 

हनुमान जी को पकड़ कर जब राम के दरबार में लाया गया तो उन्हें मृत्युदंड की सजा दी गई, लेकिन जो भक्त भगवान की शरण में जाते हैं उन्हें बचाने के लिए वे किसी ने किसी रूप में प्रकट हो जाते हैं और रावण के दरबार में विभीषण के रूप में हनुमान जी के बचाव में सामने आए। उनके कहने पर रावण ने हनुमान जी को मृत्युदंड ने देकर  उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया, लेकिन हनुमान जी ने उल्टे पूरी लंका को ही जला। इसके बाद लंका में जाकर उसको जला दिया। बाद में माता- जानकी से मिलने पहुंचे और तब उन्होंने बताया कि उन्होंने ही लंका को जलाकर राख कर दिया है और जल्दी ही भगवान राम वानर सेवा के साथ माता जानकी को ससम्मान वापस ले जाएंगे।

इससे पहले राम कथा में गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री अरुण वसीम व राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप भी पहुंचे और उन्होंने मंच पर जाकर कथा पीठ का आशीर्वाद लिया. इस मौके पर मानव अध्यक्ष को भी कौशल जी महाराज ने आशीर्वाद दिया और उनके वैवाहिक वर्ष गांठ की शुभकामनाएं दीं। पूज्य श्री विजय कौशल जी महाराज के पावन श्रीमुख से प्रवाहित रामकथा का रविवार को अंतिम दिन है। मंगलमय परिवार ने सभी भक्तों से अंतिम दिन की कथा में पहुंचकर धार्मिक लाभ लेने का आह्वान किया है।

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