सकट चौथ का त्योहार 6 जून को मनाया जाएगाः आचार्य दीपक तेजस्वी


◼️संतान की लंबी आयु व परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है



रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि सकट चौथ के त्योहार को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। इस भ्रम का कारण चतुर्थी तिथि का 6 व 7 जनवरी दोनों दिन होना है, मगर वे किसी भ्रम में ना रहे और मंगलवार 6 जनवरी को ही सकट चौथ का व्रत रखें। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में सकट चौथ के त्योहार का विशेष महत्व होता है। सकट चौथ हर वर्ष पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि मंगलवार 06 जनवरी को सुबह 08.01 बजे से शुरू होकर बुधवार 07 जनवरी को सुबह 06.52 बजे तक रहेगी। 

ऐसे में उदयातिथि के अनुसार सकट चौथ का व्रत मंगलवार 06 जनवरी मंगलवार को ही रखा जाएगा क्योंकि बुधवार को सुबह 06.52 बजे के बाद चतुर्थी तिथि ही नहीं होगी। ऐसे में व्रत भी नहीं रखा जा सकेगा। अतः सभी मंगलवार को ही व्रत रखें, तभी उसका फल प्राप्त होगा। आचार्य दीपक तेजस्वी ने बताया कि सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा करने के विधान होता है। इस त्योहार को संकष्टी चतुर्थी,ें ,माघी चौथ, संकटा चौथ, तिलकुट चौथ आदि नामों से भी जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ संकटों का हरण करने वाली चतुर्थी है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेशजी की पूजा-अर्चना कर रात्रि में चद्रमा को अर्घ्य देने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

घर -परिवार पर आ रही विघ्न -बाधाओं से मुक्ति मिलती है और रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। संतानों  इस चतुर्थी में चन्द्रमा के दर्शन करने से गणेश जी के दर्शन का पुण्य फल मिलता है। सकट चौथ पर व्रत रखकर भगवान गणेश के साथ चौथ माता की विधि पूर्वक आराधना कर उन्हें तिल के लड्डूओं या गुड़-तिल से बना तिलकुटा का भोग लगाना चाहिए। रात्रि में चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद ही अपने व्रत का पारण करना चाहिए।

Post a Comment

Previous Post Next Post