इस बार गुरू पूर्णिमा का पर्व कई शुभ योग में मनाया जाएगाः आचार्य दीपक तेजस्वी


◼️गुरू पूर्णिमा का पर्व अपने गुरू के प्रति कृतज्ञता और समर्पण का दिन है



रिपोर्ट :- अजय रावत 

गाजियाबाद :- आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और सद्मार्ग का आधार माना गया है और गुरू पूर्णिमा का पर्व अपने गुरू के प्रति कृतज्ञता और समर्पण का दिन है। इस बार गुरू पूर्णिमा का पर्व बुधवार 29 जुलाई श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस बार की गुरू पूर्णिमा बहुत ही खास है क्योंकि इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। आचार्य दीपक तेजस्वी ने बताया कि इस बार 56 वर्ष बाद ऐसे शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें गुरु पूजन, मंत्र जापए और दान- पुण्य करने का कई गुना अधिक फल मिलता है। 

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर इस बार 56 साल बाद बुधादित्य राजयोग, हंस राजयोग और शश राजयोग का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। इन महा संयोग में गुरू पूजन करने से बुद्धि ज्ञान, बल, तेज में वृद्धि होती है। जीवन में सुख- समृद्धि आती है। आचार्य दीपक तेजस्वी ने कहा कि यह दिन अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का विशेष अवसर है। गुरु अपने ज्ञान और अनुभव से शिष्य के जीवन को उचित दिशा प्रदान करते हैं तथा अज्ञानरूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। 

गुरू पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु के अंशावतार महर्षि वेद व्यास का अवतरण हूआ था। महर्षि वेद व्यास को आदि गुरू कहा जाता है क्योंकि वेद, पुराण व महाभारत के रचियेता वे ही हैं। वेदों व पुराण का सबसे पहले ज्ञान ही उन्होंने ही दिया था। इसी कारण कथा आदि के माध्यम से हमें ज्ञान देने वाले को हम व्यास कहकर ही सम्बांधित किया जाता है।

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