रिपोर्ट :- अजय रावत
गाजियाबाद :- कनावनी पुलिया के पास 16 जनवरी को 40 साल के बच्चे पर स्ट्रे डॉग्स ने हमला किया। इस हमले में मासूम के सिर में आए हैं 36 टांके। यह तीसरी कैटोग्री में आता है इसलिए टाँके लगाने से पहले काटने कि जगह को साबुन से साफ़ करके उसमे एंटी रैबीज सीरम लगाना चाहिये था लेकिन जिस अस्पताल में इलाज हुआ उसने सीरम नहीं लगाया। डॉ बीपी त्यागी ने बताया कि जिसके कारण बच्चे की जान खतरे में है। अगर 24 घंटे के अंदर सीरम नहीं लगा तो बच्चे को हो सकता है रैबीज। जो की 100% जान लेवा है। सीरम (RIG) या तो सरकारी अस्पताल तुरंत लगाएं या डॉ बीपी त्यागी हर्ष अस्पताल में उसे फ्री में लगायेंगे। बच्चे की हालत भी काफी गंभीर बताई जा रही है।
डॉ बीपी त्यागी ने कहा कि गाजियाबाद नगर निगम स्ट्रीट डॉग्स पर कार्रवाई की बात करता है लेकिन इस तरीके की घटनाएं कागजी खानापूर्ति की तरफ इशारा करती है। इस कागजी खानापूर्ति में गाजियाबाद नगर निगम सबसे आगे है। जहां एक तरफ इन स्ट्रीट डॉग्स को कैप्चर करने के लिए नगर निगम विभाग को सक्रिय होना चाहिए वहीं खुलेआम घूम रहे इन डॉग्स के हमले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। अब इस बार कनावानी इलाके में 4 साल के मासूम पर स्ट्रीट डॉग्स ने किया है हमला इस हमले का खामियाज़ा 4 साल के मासूम को भुगतना पड़ा है जो यह भी नहीं जानता कि आखिर इसका कसूर क्या था।
डॉ बीपी त्यागी ने बताया कि एक तरफ तो डॉग लवर्स यह कहते हैं कि जब तक डॉग्स को छेड़ा ना जाए तब तक वह गुस्सैल होकर किसी को काटते नहीं है। वहीं इस तरह की घटना से साफ है कि स्ट्रीट डॉग्स कभी भी भयानक रूप लेकर किसी पर भी अटैक कर सकते हैं। मासूम का परिवार काफी गरीब है और वह मासूम के इलाज के लिए हुए खर्च को देखते हुए भी काफी परेशान है। हालांकि अब एक बार फिर से जरूरत है कि नगर निगम सड़कों पर घूम रही इस मौत से गाजियाबाद की आवाम को बचाएं जिससे गाजियाबाद का नागरिक अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम इस खबर के चलने के बाद कितना हरकत में आती है। या सरकारी अस्पताल कितना ध्यान देता है।