◼️जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है तब - तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं: अमित आनंद जी महाराज
◼️यजमान विकास बंसल ने किया परिवार सहित कथा का श्रवण
रिपोर्ट :- अजय रावत
गाज़ियाबाद :- प्रताप विहार स्थित श्रीबालाजी धाम मंदिर परिसर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कृष्ण जन्म के प्रसंग शुरू होते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजनों के साथ झूम उठे। वहीं श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर मक्खन मिश्री के प्रसाद का भोग लगाकर वितरित किया।
वृंदावन धाम से पटरे कथा वाचक अमित आनंद जी महाराज ने कहा कि जीवन में जब भी भगवत नाम सुनने का अवसर प्राप्त हो, उससे विमुख नहीं होना चाहिए। भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि जब जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब तब परमात्मा अवतार धारण करके धरती पर धर्म की स्थापना करते हैं।कृष्ण जन्म की कथा के पूर्व भगवान राम के अवतार की लीला का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने आदर्श स्थापित किया है, वह आज भी प्रासंगिक है। राम जन्म, ताड़का वध, राम विवाह, वनवास, रावण वध सहित राम राज्याभिषेक पर सुन्दर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि द्वापर में जब कंस के अत्याचार बढ़े तो श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर मुक्ति दिलाई। वासुदेव जी के साथ श्रीकृष्ण भगवान की झांकी ने सभी का मन मोह लिया।जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नन्द के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाईयां दी गई, एक-दूसरे को खिलौने और मिठाईयां बांटी गई।
कथा महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भजन प्रदुम कर भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई। यजमान विकास बंसल ने माताजी ऊषा बंसल, धर्मपत्नी कामनी बंसल ,पुत्र मयंक बंसल, हर्षित बंसल और पुत्रवधू अदिति बंसल के साथ चतुर्थ कथा का श्रवण किया।श्रीमद् भागवत कथा का रसपान हर व्यक्ति को करना चाहिए। इस अवसर पर विवेक अग्रवाल, नरेंद्र चंदीला ,विनोद कुमार ,दादरी से पधारे लक्ष्मण शर्मा ,संजय शर्मा सभासद, संदीप शर्मा, संजय शर्मा, निरपेंद्र गोस्वामी, निशा गोस्वामी के साथ काफी संख्या में भक्त जनों ने कथा का रसपान किया।